Bokaro: झारखंड के बोकारो जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली (Functioning of Bokaro Police) पर गंभीर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। घायल युवक को अस्पताल ले जाने के बजाय उसे पुलिस हाजत में बंद करने और नियमों की अनदेखी के मामले में चिरा चास थाना प्रभारी समेत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
एसपी नाथू सिंह मीना के इस कड़े रुख से महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला 1 मई से शुरू हुआ था, जब हर्ष पांडेय नामक व्यक्ति ने आरिफ अंसारी और अन्य पर मारपीट का आरोप लगाया था। पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी। इसी बीच, प्रतिशोध में हर्ष और उसके साथियों ने आरिफ अंसारी की जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
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इलाज के बजाय हाजत: मानवाधिकारों का उल्लंघन
नियमों के अनुसार, पुलिस को घायल आरिफ को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। लेकिन चिरा चास थाने की पुलिस उसे उठाकर सीधे थाना ले आई और लहूलुहान हालत में ही हाजत में बंद कर दिया। इस दौरान आरिफ के परिवार की महिलाओं ने थाने पहुंचकर पुलिस की इस अमानवीयता का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
हाफ पैंट में ड्यूटी और लापरवाही
वायरल वीडियो में न केवल घायल युवक की स्थिति दिखी, बल्कि अनुशासनहीनता की हद भी पार होती नजर आई। वीडियो में एएसआई संजय कुमार मंडल थाना परिसर में हाफ पैंट पहनकर घूमते हुए दिखे। एसपी ने जांच में पाया कि थाना प्रभारी का अपने मातहतों पर कोई नियंत्रण नहीं है और थाने में ड्रेस कोड का भी पालन नहीं हो रहा है।
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इन अधिकारियों पर गिरी गाज:
एसपी नाथू सिंह मीना ने जांच रिपोर्ट के आधार पर निम्नलिखित तीन अधिकारियों को निलंबित (Suspend) कर दिया है:
पुष्प राज कुमार (थाना प्रभारी, चिरा चास)
राजेश कुमार (सब-इंस्पेक्टर)
संजय कुमार मंडल (एएसआई)
एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिसिंग में लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

