Agra: आगरा में आठ वर्षीय मासूम की सड़क हादसे में मौत के बाद उसका परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित पिता का आरोप है कि जिस व्यक्ति ने फॉर्च्यूनर कार से उनके बेटे को टक्कर मारी, उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने किसी दूसरे व्यक्ति को आरोपी बनाकर आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
अब परिवार पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
दुकान के उद्घाटन की खुशी पलभर में मातम में बदली
ताजगंज क्षेत्र के तुलसी चबूतरा निवासी विजय के अनुसार, 6 फरवरी को वह बमरौली कटारा में अपनी नई फास्ट फूड दुकान का उद्घाटन करने गए थे। पूरा परिवार इस मौके पर मौजूद था। उनका आठ वर्षीय बेटा शिवा दुकान के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में शिवा की मौत हो गई, जबकि पास में मौजूद उसकी बड़ी बहन बाल-बाल बच गई। विजय ने कार चालक का पीछा भी किया, लेकिन वह मौके से फरार हो गया।
असल चालक को बचाने का आरोप
परिजनों का कहना है कि शुरुआती जांच में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को कार चालक बताते हुए उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। परिवार का दावा है कि घटना के समय वास्तविक चालक सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दे रहा है, फिर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अहम गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।
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जांच बदली, लेकिन नतीजा वही
पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद मामले की विवेचना दूसरे थाने में स्थानांतरित कर दी गई। परिजनों को उम्मीद थी कि इस बार निष्पक्ष जांच होगी, लेकिन उनका आरोप है कि नई जांच में भी पुरानी रिपोर्ट के आधार पर ही चार्जशीट भेज दी गई। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी, जो घटना की प्रत्यक्षदर्शी है, उससे भी पूछताछ नहीं की गई।
अधिकारियों ने दिए जांच के भरोसे
डीसीपी पूर्वी जोन अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि विवेचना में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उधर, बेटे को खो चुके माता-पिता का कहना है कि उन्हें केवल एक ही उम्मीद है जिसकी लापरवाही से उनके बेटे की जान गई, उसे कानून के दायरे में लाया जाए।

