New Delhi: हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जाता है। यह दिन पिता के प्रेम, त्याग और समर्पण को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। साल 2026 में फादर्स डे 21 जून, रविवार को मनाया जाएगा।
भारत में इसे 'पितृ दिवस' के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने पिता के प्रति प्यार और आभार व्यक्त करते हैं।
भारतीय संस्कृति में पिता का महत्व
भारतीय परंपरा में पिता को परिवार का आधार माना गया है। वे केवल पालन-पोषण करने वाले ही नहीं, बल्कि बच्चों के पहले गुरु और मार्गदर्शक भी होते हैं। धार्मिक दृष्टि से देखें तो नंद बाबा का उदाहरण सबसे प्रेरणादायक माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के पालक पिता नंद बाबा ने जिस स्नेह और जिम्मेदारी के साथ कृष्ण और बलराम का पालन किया, वह हर पिता के लिए आदर्श है। पिता बच्चों को संस्कार, अनुशासन और जीवन की सही दिशा देने का कार्य करते हैं।
क्यों मनाया जाता है फादर्स डे?
फादर्स डे का मुख्य उद्देश्य पिता के योगदान और उनके संघर्षों के प्रति सम्मान प्रकट करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पिता परिवार के लिए कितने त्याग करते हैं। वे बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य के लिए निरंतर मेहनत करते हैं। ऐसे में यह दिन उन्हें धन्यवाद कहने और उनके प्रति अपना प्रेम जताने का खास अवसर बन जाता है।
एक बेटी की भावुक कहानी से हुई शुरुआत
फादर्स डे की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। इसकी पहल सोनोरा स्मार्ट डोड नाम की महिला ने की थी। उनके पिता अमेरिकी गृहयुद्ध के सैनिक थे। पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने अकेले अपने छह बच्चों की परवरिश की। पिता के संघर्ष और प्रेम को देखकर सोनोरा ने तय किया कि मातृ दिवस की तरह पिताओं के सम्मान में भी एक दिन होना चाहिए। इसके बाद 19 जून 1910 को पहली बार फादर्स डे मनाया गया। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गई।
डिजिटल युग में बदल गया जश्न मनाने का तरीका
आज सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में फादर्स डे मनाने के तरीके भी बदल गए हैं। लोग सोशल मीडिया पर अपने पिता के साथ तस्वीरें साझा करते हैं और भावुक संदेश लिखते हैं। कई लोग ऑनलाइन गिफ्ट जैसे स्मार्ट वॉच, किताबें, कपड़े और गैजेट्स ऑर्डर करते हैं। वहीं जो लोग अपने परिवार से दूर रहते हैं, वे वीडियो कॉल के जरिए इस दिन को खास बनाते हैं।
भारत में बढ़ रहा उत्साह
भारत के शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी फादर्स डे को लेकर उत्साह तेजी से बढ़ रहा है। भले ही इस दिन कोई सरकारी अवकाश नहीं होता, लेकिन युवा पीढ़ी इसे अपने "साइलेंट हीरो" यानी पिता को सम्मान देने का सबसे अच्छा अवसर मानती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपहारों से ज्यादा जरूरी है कि हम अपने पिता के संस्कारों और मूल्यों का सम्मान करें।
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