Kannauj: जनपद के छिबरामऊ नगर पालिका परिषद कार्यालय में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब सरकारी जमीन के कथित अवैध आवंटन के मामले को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई।
मामला इतना बढ़ गया कि कार्यालय का माहौल तनावपूर्ण हो गया और उपस्थित लोगों को बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराना पड़ा।
वर्ष 2022 में हुए आवंटन पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र छिबरामऊ नगर पालिका की दुकानों से जुड़ा एक कथित आवंटन है। आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में 'कानपुर टेलर' के मालिक मोहम्मद शमी ने तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) सुरेंद्र कुमार केसरवानी के साथ मिलीभगत कर नगर पालिका की लगभग तीन फुट सरकारी जमीन का गलत तरीके से आवंटन करवा लिया था। इसी कथित अनियमितता को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे थे।
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सैकड़ों पदाधिकारियों के साथ पहुंचे संगठन
मामले को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के कानपुर मंडल उपाध्यक्ष श्रेयस द्विवेदी (एडवोकेट गुड्डा), नव हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम बाजपेई तथा भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष राजा शुक्ला के नेतृत्व में सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अध्यक्ष के सामने उठा मुद्दा, बढ़ा विवाद
जब यह मामला नगर पालिका अध्यक्ष मनोज दुबे के सामने उठाया गया तो कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। प्रदर्शनकारियों और नगर पालिका पक्ष के बीच बहस का दौर चलता रहा, जिससे माहौल काफी गर्म हो गया। कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हालांकि वहां मौजूद लोगों ने समझाइश देकर माहौल को शांत कराया और किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनने दी।
10 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो धरने की चेतावनी
विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदूवादी संगठनों और भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रशासन को सख्त चेतावनी दी। उनका कहना था कि यदि 10 दिनों के भीतर कथित अवैध आवंटन को निरस्त नहीं किया गया तो नगर पालिका परिषद कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारी जमीन से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होना आवश्यक है।
चेयरमैन मनोज दुबे ने दिया जांच का आश्वासन
नगर पालिका अध्यक्ष मनोज दुबे ने अपने पक्ष में कहा कि संबंधित आवंटन उनके कार्यकाल में नहीं हुआ था। उनके अनुसार यह प्रक्रिया तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र कुमार केसरवानी के कार्यकाल के दौरान पूरी हुई थी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और आगामी बोर्ड बैठक में इस आवंटन को निरस्त करने का प्रस्ताव लाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। अब सभी की निगाहें प्रशासन और नगर पालिका परिषद की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखने वाली बात होगी कि प्रदर्शनकारियों द्वारा दिए गए 10 दिनों के अल्टीमेटम के भीतर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या यह मामला आगे भी विवाद का विषय बना रहता है।

