Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीति तैयार करने वाली मशहू
बंध (Contract) खत्म कर दिया है।
गौरतलब है कि यही वह एजेंसी है जिसने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए काम किया था और इसका सीधा जुड़ाव प्रशांत किशोर से रहा है। अखिलेश यादव ने इस फैसले के पीछे आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए भाजपा पर भी तीखा हमला बोला है।
एजेंसी को लेकर अखिलेश का खुलासा
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आई-पैक के साथ अनुबंध खत्म करने की पुष्टि की। जब उनसे पूछा गया कि आखिर चुनाव के बीच यह फैसला क्यों लिया गया, तो उन्होंने मजाकिया लहजे में लेकिन सीधे तौर पर कहा कि पार्टी के पास भारी-भरकम फीस चुकाने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कई जानकारों ने उन्हें अन्य एजेंसियों के नाम सुझाए हैं, जिन्हें भविष्य में हायर किया जा सकता है।
भाजपा पर 'डेमोक्रेटिक क्राइम गैंग' बनाने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा अध्यक्ष ने भाजपा के कार्य करने के तरीके पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में एक विशेष विचारधारा के अधिकारियों, ठेकेदारों और मुनाफाखोरों का एक 'लोकतांत्रिक अपराध गैंग' (DCG) बन गया है। अखिलेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भाजपा आज बंगाल में वोट लूट रही है, वह कल देश का आरक्षण भी लूट लेगी।
2022 चुनाव और बंगाल की तुलना
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने भी वैसे ही हालात देखे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय बलों का दुरुपयोग कर सपा एजेंटों को बाहर निकाला गया और महिलाओं को डरा-धमकाकर वोट देने से रोका गया।

