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मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज में छात्रों का फूटा गुस्सा, प्रिंसिपल के खिलाफ धरने पर बैठे MBBS स्टूडेंट्स; बोले- अब पढ़ाई नहीं.

मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज में छात्रों का फूटा गुस्सा, प्रिंसिपल के खिलाफ धरने पर बैठे MBBS स्टूडेंट्स; बोले- अब पढ़ाई नहीं.

Mirzapur: मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रविवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब बड़ी संख्या में एमबीबीएस छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू कर दिया।

छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से बिजली, पानी, हॉस्टल, मेस और लाइब्रेरी जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आखिरकार छात्रों ने प्रदर्शन का रास्ता चुना।

कॉलेज परिसर में जुटे छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि पढ़ाई का माहौल तभी बन सकता है, जब छात्रों को रहने और पढ़ने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

सुबह से गुल रही बिजली

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि रविवार सुबह से ही कॉलेज और छात्रावास की बिजली पूरी तरह बाधित रही। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों तक बिजली नहीं आने से छात्र परेशान हो गए। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज परिसर में जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद उसे समय पर चालू नहीं किया गया। बिजली बंद होने से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई, जिससे पीने के पानी और दैनिक जरूरतों के लिए भी छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

उनका कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई पहले ही काफी चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में अगर मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी तो पढ़ाई पर सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है।

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एक कमरे में तीन-तीन छात्र

धरने के दौरान छात्रों ने हॉस्टल की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक कमरे में तीन-तीन छात्रों को रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि कमरे इतने छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। छात्रों के मुताबिक, इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है बल्कि आराम और निजी जगह की भी भारी कमी महसूस होती है। उनका कहना है कि मेडिकल छात्रों को शांत माहौल की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं हो पा रहा है।

मेस और लाइब्रेरी को लेकर भी जताई नाराजगी

एमबीबीएस छात्रों ने मेस की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि समय पर भोजन और नाश्ते की सुविधा नहीं मिलती। कई बार उन्हें कॉलेज से बाहर जाकर नाश्ता खरीदना पड़ता है। इसके अलावा छात्रों ने लाइब्रेरी की व्यवस्था को भी असंतोषजनक बताया। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में लाइब्रेरी का बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है, लेकिन यहां उपलब्ध सुविधाएं छात्रों की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

पहले भी की थीं शिकायतें

धरना दे रहे छात्रों का कहना है कि यह विरोध अचानक नहीं हुआ है। उन्होंने कई बार कॉलेज प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। हर बार उन्हें जल्द समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन हालात जस के तस बने रहे। छात्रों का कहना है कि लगातार अनदेखी के कारण उन्हें मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ा। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

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प्रशासन ने छात्रों से की बातचीत

धरने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। छात्रों ने अधिकारियों के सामने भी अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं और कहा कि कॉलेज में करोड़ों रुपये के बजट की बात होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने मांग की कि सभी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

पढ़ाई का माहौल सुधारने की उठी मांग

मेडिकल कॉलेज में चल रहे इस प्रदर्शन ने संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि सिर्फ इतनी मांग कर रहे हैं कि उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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