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ताजमहल में भीड़ पर लगेगी लगाम, एक घंटे में अधिकतम 6000 से कम पर्यटकों को मिलेगा प्रवेश

ताजमहल में भीड़ पर लगेगी लगाम, एक घंटे में अधिकतम 6000 से कम पर्यटकों को मिलेगा प्रवेश

New Delhi: यूनेस्को की विश्व धरोहर ताजमहल में बढ़ती भीड़ और उससे हो रहे नुकसान को देखते हुए अब यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली को ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता तय करने के लिए अध्ययन सौंपने का निर्णय लिया है।

जल्द ही आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ताजमहल का दौरा कर अध्ययन शुरू करेगी।

रोजाना हजारों सैलानियों की भीड़

ताजमहल में हर दिन लगभग 25 से 30 हजार पर्यटक पहुंचते हैं। वहीं सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में यह संख्या बढ़कर 50 हजार से भी अधिक हो जाती है। 15 वर्ष तक की उम्र वाले पर्यटकों के लिए निशुल्क प्रवेश होने के कारण भी भीड़ और बढ़ जाती है। इतनी अधिक संख्या में पर्यटकों के आने से स्मारक पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे इसके संरक्षण को लेकर चिंता जताई जा रही है।

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पहले भी हो चुका है अध्ययन

ताजमहल में भीड़ प्रबंधन और वहन क्षमता को लेकर यह पहली बार अध्ययन नहीं हो रहा है। करीब 11 वर्ष पहले राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी शोध संस्थान (नीरी) ने इस विषय पर रिपोर्ट तैयार की थी। उस रिपोर्ट में कई सिफारिशें भी की गई थीं, लेकिन अब सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की सिफारिश के बाद फिर से नए सिरे से अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया है।

नीरी की प्रमुख सिफारिशें

नीरी की रिपोर्ट में ताजमहल में भीड़ नियंत्रण के लिए कई अहम सुझाव दिए गए थे। इनमें शामिल हैं-

  • एक घंटे में अधिकतम 6000 से कम पर्यटकों को प्रवेश दिया जाए।
  • स्मारक में एक पर्यटक को अधिकतम 90 मिनट तक रुकने की अनुमति हो।
  • जब 9000 से अधिक पर्यटक परिसर में पहुंच जाएं तो अतिरिक्त पर्यटकों को रोक दिया जाए।
  • ताजमहल के अंदर मौजूद पर्यटकों की संख्या दर्शाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड लगाए जाएं।

इन सुझावों के आधार पर भी कुछ कदम पहले उठाए गए थे, लेकिन अब नए अध्ययन के जरिए स्थिति का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा।

अतिरिक्त शुल्क और भीड़ नियंत्रण उपाय

एएसआई ने नीरी की रिपोर्ट के बाद 10 दिसंबर 2018 से ताजमहल के मकबरे पर 200 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लागू किया था। इस कदम के बाद केवल लगभग 10 प्रतिशत पर्यटक ही मकबरे तक पहुंचते हैं। यानी प्रतिदिन आने वाले 25-30 हजार पर्यटकों में से केवल 2 से 3 हजार ही यह अतिरिक्त टिकट लेकर अंदर जाते हैं।

इसके अलावा तीन घंटे का समय स्लॉट भी तय किया गया है। यदि कोई पर्यटक तय समय से अधिक रुकता है, तो उसे दोबारा टिकट लेना पड़ता है। यह व्यवस्था भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लागू की गई थी।

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IIT दिल्ली करेगी नया सर्वे

एएसआई के अनुसार, अब आईआईटी दिल्ली की टीम ताजमहल की वास्तविक वहन क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। इस अध्ययन के आधार पर यह तय किया जाएगा कि एक समय में परिसर और मकबरे में कितने पर्यटक मौजूद हो सकते हैं और रोजाना कितने सैलानियों को प्रवेश दिया जाना चाहिए।

एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ स्मिथा कुमार ने बताया कि आईआईटी दिल्ली से संपर्क किया गया है और उनकी टीम जल्द ही ताजमहल का दौरा कर अध्ययन शुरू करेगी।

संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन की कोशिश

ताजमहल जैसे ऐतिहासिक स्मारक पर बढ़ती भीड़ के कारण संरक्षण को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में नए अध्ययन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन भी चलता रहे और स्मारक को नुकसान भी न पहुंचे। IIT दिल्ली की रिपोर्ट के बाद ताजमहल में पर्यटकों की संख्या को लेकर नए नियम लागू किए जा सकते हैं।

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