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मिडल ईस्ट वॉर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर? ६.९% रहेगी जीडीपी ग्रोथ, रिजर्व बैंक का नया अपडेट

मिडल ईस्ट वॉर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर? ६.९% रहेगी जीडीपी ग्रोथ, रिजर्व बैंक का नया अपडेट

Ek Jhalak Hindi 1 week ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार, ८ अप्रैल को नए वित्त वर्ष २०२६-२७ की पहली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है।

हालांकि, विकास दर (Growth Forecast) को लेकर कुछ सावधानी बरती गई है।

विकास दर में मामूली गिरावट: आरबीआई ने वित्त वर्ष २०२७ के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर का अनुमान ६.९ प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष (FY26) के ७.६ प्रतिशत की तुलना में कम है। गवर्नर ने संकेत दिया कि मध्य पूर्व (इजरायल-ईरान) में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आर्थिक गति प्रभावित हुई है। इसी के मद्देनजर, वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों (Q1 और Q2) के विकास अनुमान को थोड़ा घटाकर क्रमशः ६.९% और ६.८% कर दिया गया है। हालांकि, साल की दूसरी छमाही में इसके ७.२% तक पहुंचने की उम्मीद है।

महंगाई का मोर्चा: आरबीआई गवर्नर ने पूरे वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) का अनुमान ४.६ प्रतिशत जताया है। मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर है, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों और खाद्य वस्तुओं पर पड़ने वाले मौसमी प्रभाव के कारण जोखिम बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ईंधन और बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान महंगाई को बढ़ा सकता है।

रेपो रेट और तटस्थ रुख: रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के ५.२५% पर स्थिर रखा गया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से ‘तटस्थ’ (Neutral) रुख अपनाने का फैसला किया है। गवर्नर ने विश्वास जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है, जो इसे बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम बनाती है। अगली मौद्रिक नीति बैठक ३ से ५ जून, २०२६ के बीच आयोजित की जाएगी।

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