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8th Pay Commission में 3.83 फिटमेंट फैक्टर की बड़ी मांग, क्या सरकारी कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी बढ़कर हो जाएगी 69,000 रुपये?

8th Pay Commission में 3.83 फिटमेंट फैक्टर की बड़ी मांग, क्या सरकारी कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी बढ़कर हो जाएगी 69,000 रुपये?

ठवां वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) इस महीने के अंत तक दिल्ली में और अगले महीने पुणे में कर्मचारी यूनियनों, एसोसिएशनों, केंद्रीय संगठनों और संस्थानों के साथ बैठकें करने की तैयारी में है।

इन बैठकों के लिए आयोग ने कर्मचारी संगठनों से सुझावों से जुड़े मेमोरेंडम जमा करने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए आवेदन विंडो भी खोल दी है, जिसकी अंतिम तारीख 20 अप्रैल तय की गई है। इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के संगठन नेशनल काउंसिल ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council Joint Consultative Machinery - JCM) ने 8वें वेतन आयोग को 51 पन्नों का एक मेमोरेंडम सौंपा है। इस मेमोरेंडम में कई अहम मांगें रखी गई हैं, जिनमें सबसे प्रमुख 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

नेशनल काउंसिल ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी दरअसल केंद्र सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद का एक आधिकारिक प्लेटफार्म है, जिसमें कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं। इसका मुख्य काम सैलरीज, अलाउंस, सर्विस कंडीशन्स और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सरकार को सुझाव देना है। JCM के स्टाफ साइड के सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि यह 51 पन्नों का मेमोरेंडम तय समय-सीमा से पहले ही वेतन आयोग को सौंप दिया गया है। उनके मुताबिक, यह मेमोरेंडम कर्मचारियों की बदलती जरूरतों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें कई बड़े बदलावों के प्रस्ताव शामिल हैं।



सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 (जो 7वें वेतन आयोग में लागू है) से बढ़ाकर 3.833 करने की है। इसके साथ ही मिनिमम सैलरी को 18,000 रुपये से बढ़ाकर करीब 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं अधिकतम वेतन 2,15,000 रुपये तय करने की मांग भी की गई है। यानी अगर ये प्रस्ताव लागू हो जाते हैं, तो लेवल-1 से लेकर टॉप लेवल तक सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

परिवार के आकार को 3 से बढ़ाकर 5 सदस्यों तक मानने की मांग की गई है। साथ ही पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए यूनिट वैल्यू में समानता की बात कही गई है, यानी दोनों को 1-1 यूनिट मिले। इसके अलावा, परिवार की परिभाषा में माता-पिता को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। सीधे तौर पर समझें तो इन बदलावों का असर अलाउंसेस और मिनिमम सैलरी की गणना पर पड़ेगा, यानी कर्मचारियों को मिलने वाली कुल सुविधाओं और सैलरी स्ट्रक्चर में बढ़ोतरी हो सकती है।

सालाना सैलरी इंक्रीमेंट की दर को बढ़ाकर 6% करने की मांग भी रखी गई है। मकसद साफ है कि कर्मचारियों की आय हर साल पहले से ज्यादा तेज़ी से बढ़े, ताकि बढ़ती महंगाई के असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सके। मेमोरेंडम में सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और साफ बनाने के लिए कई पे-स्केल को मिलाने का प्रस्ताव रखा गया है।

  • पे स्केल 2 और 3 को मिलाकर नया पे स्केल 2 बनाया जाए
  • पे स्केल 4 और 5 को मिलाकर नया पे स्केल 3 बनाया जाए
  • पे स्केल 6 को संशोधित कर नया पे स्केल 4 बनाया जाए
  • पे स्केल 7 और 8 को मिलाकर नया पे स्केल 5 तैयार किया जाए
  • पे स्केल 9 और 10 को मिलाकर नया पे स्केल 6 बनाया जाए

उपरोक्त सुझावों का मकसद यह है कि सैलरी स्ट्रक्चर कम जटिल हो और ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को इसका फायदा मिल सके। इस मेमोरेंडम में महिला कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों की सुरक्षा पर भी खास जोर दिया गया है। इसमें समानता सुनिश्चित करने, परिवार से जुड़े लाभ बढ़ाने और आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करने से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं।

फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक ऐसा मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। आसान भाषा में समझें तो जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होगा, उतनी ही ज्यादा सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की मांगें लगातार तेज होती जा रही हैं और महंगाई भत्ता (DA/DR) में बदलाव व महंगाई से जुड़ी सैलरी बढ़ोतरी को लेकर चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। ऐसे माहौल में नेशनल काउंसिल JCM का यह मेमोरंडम आने वाले महीनों में सरकार के फैसलों पर असर डाल सकता है। फिलहाल ये सभी प्रस्ताव सिर्फ सिफारिशें हैं। अंतिम फैसला सरकार और वेतन आयोग के गठन के बाद उसी के हाथ में होगा।
(Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, न कि निवेश की सलाह है। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार भी नहीं हैं। अपने पाठकों और दर्शकों को ET NOW Swadesh पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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