Corporate NPS: नौकरीपेशा लोगों के बीच आयकर बचाने की होड़ मची रहती है। अधिकांश लोग आयकर की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की सीमा और धारा 80CCD(1B) के तहत एनपीएस में अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट तक ही सीमित रह जाते हैं।
लेकिन एनपीएस सीक्रेट तरीके से अतिरिक्त टैक्स बचाने का भी मौका देता है। इसे कॉर्पोरेट एनपीएस कहा जाता है। आइये इस बारे में जानते हैं।
उच्च टैक्स ब्रैकेट वालों का सबसे ज्यादा फायदा
अगर आप उच्च टैक्स ब्रैकेट (जैसे 30%) में आते हैं और अपनी टैक्स देनदारी को स्मार्ट तरीके से कम करना चाहते हैं, तो कॉर्पोरेट एनपीएस गेम चेंजर साबित हो सकता है।
क्या है कॉर्पोरेट एनपीएस?
कॉर्पोरेट एनपीएस, नेशनल पेंशन सिस्टम का ही एक हिस्सा है, जिसे विशेष रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा धारा 80CCD(2) में छिपा है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। जहां 80C और 80CCD(1B) की सीमाएं खुद के निवेश पर लागू होती हैं, वहीं धारा 80CCD(2) नियोक्ता द्वारा आपके एनपीएस खाते में किए गए योगदान पर टैक्स छूट दिलाता है।
यह कैसे काम करता है?
नियमों के अनुसार, अगर नियोक्ता मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10% तक कॉर्पोरेट एनपीएस खाते में जमा कर सकता है। यह योगदान आपकी कुल कर योग्य आय से सीधे घटा दिया जाएगा है।
कॉर्पोरेट एनपीएस के 3 बड़े फायदे
आप स्वयं निवेश कर 1.5 लाख रुपये (80C) और 50,000 रुपये (80CCD(1B)) के तहत बचा सकते हैं।
नियोक्ता द्वारा किया गया 10% योगदान (80CCD(2)) पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।
कम लागत: रिटेल एनपीएस के मुकाबले कॉर्पोरेट एनपीएस में फंड मैनेजमेंट चार्ज काफी कम होते हैं, जिससे लंबी अवधि में आपका रिटर्न बढ़ता है।
पोर्टेबिलिटी और निरंतरता: यदि आप नौकरी बदलते हैं, तो आपका Permanent Retirement Account Number (PRAN) वही रहता है। आप नई कंपनी में जाकर इसे फिर से कॉर्पोरेट एनपीएस से जोड़ सकते हैं।
कैसे करें इसका इस्तेमाल?
पहला कदम: सबसे पहले अपनी कंपनी के एचआर से संपर्क करें और पूछें कि क्या वे कॉर्पोरेट एनपीएस मॉडल को सपोर्ट करते हैं।
दूसरा कदम: यदि कंपनी सहमत है, तो अपने सैलरी स्ट्रक्चर को री-स्ट्रक्चर करने का विकल्प चुनें। अपने मूल वेतन (Basic + DA) के 10% को एनपीएस योगदान के रूप में दिखाने का अनुरोध करें।
तीसरा कदम: यदि आपके पास पहले से PRAN खाता है, तो उसे कंपनी के कॉर्पोरेट एनपीएस पोर्टल से जोड़ें। यदि नहीं, तो ई-एनपीएस (eNPS) पोर्टल या बैंक के जरिए PRAN जनरेट करें।
चौथा कदम: एसेट एलोकेशन (इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड) और फंड मैनेजर का चयन करें।
इस उदाहरण से समझें
- यदि आपका मूल वेतन 12 लाख रुपये सालाना है और आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं।
- यदि आपकी कंपनी आपके एनपीएस में 10% योगदान देती है, तो 1,20,000 रुपये आपकी कर योग्य आय से सीधे कम हो जाएंगे।
- इससे आप साल भर में बिना कुछ किए सीधे 36,000 रुपये (1.20 लाख रुपये का 30%) का अतिरिक्त टैक्स बचा लेंगे। यह बचत 2 लाख रुपये वाली सामान्य लिमिट से अलग होगी।
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