Gold Investment, Locker Safety and Risk : साल 2025 में सोने का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। इस दौरान 53 बार गोल्ड प्राइस रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा और डॉलर के टर्म में करीब 67% सालाना रिटर्न दिया।
भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की कमजोरी के कारण यह रिटर्न करीब 73% तक पहुंच गया, जिससे सोना पिछले साल बाकी सभी एसेट क्लास से काफी आगे निकल गया।
अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर, सचिन सावरिकर का कहना है कि 2026 की बात करें तो अबतक सोने की कीमत थोड़ी स्थिर हो रही है। एक ही साल में 53 बार नया रिकॉर्ड बनाने के बाद, सोने में कुछ बिकवाली हुई है। हालांकि इसे गिरावट नहीं बल्कि बाजार का बैलेंस मानकर देखना चाहिए।
इस साल भी जनवरी में सोना 5,594 डॉलर तक पहुंचा था, जिसके पीछे प्रमुख कारण थे, बढ़ता सरकारी घाटा, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और रियल यील्ड पर दबाव। ये कारण अभी भी बाजार में मौजूद हैं। ऐसे में पीक से गिरावट के बाद लंबी अवधि के निवेशकों के लिहाज से गोल्ड में निवेश को लेकर अच्छा मौका बना हुआ है।
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पोर्टफोलियो में कितनी हो हिस्सेदारी?
सचिन सावरिकर का कहना है कि एडवाइजर पोर्टफोलियो में आमतौर पर 5 से 10% तक गोल्ड एलोकेशन की सलाह देते हैं। यह लिमिट सही पोर्टफोलियो बैलेंस बनाए रखने के लिए होती है। गोल्ड की बात करें तो यह इक्विटी या बॉन्ड की तरह कोई रेगुलर इनकम (कैश फ्लो) नहीं देता। इसलिए अगर इसमें ज्यादा पैसा लगा दिया जाए, तो पूरा पोर्टफोलियो ऐसे एसेट की तरफ झुक जाता है जो रेगुलर इनकम नहीं कराता।
5% से 10% का बैलेंस गोल्ड एलोकेशन बाजार के उतार-चढ़ाव को कम करने और क्राइसिस के समय सुरक्षा देने का काम करता है। वहीं पोर्टफोलियो में बाकी 89 फीसदी निवेश ऐसे एसेट में रहते हैं, जो समय के साथ मुनाफा बढ़ाते हैं।
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पूरा सोना लॉकर में रखना कितनी समझदारी?
सचिन सावरिकर का कहना है कि सोने में निवेश का मतलब यह नहीं कि पूरा पैसा फिजिकल गोल्ड में लगाया जाए, बल्कि इसकी जगह गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड फंड जैसे बेहतर विकल्प हैं। इनमें फिजिकल गोल्ड को सुरक्षित रखे जाने जैसा टेंशन नहीं होता है।
जिन भारतीय निवेशकों के पास पहले से बड़ी मात्रा में फिजिकल गोल्ड है, उनके लिए असली सवाल यह है कि इसे सही और सुरक्षित तरीके से कैसे रखा जाए। बैंक लॉकर में रखा सोना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि इसके कुछ जोखिम होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर समझ नहीं पाते।
आरबीआई के नियम के अनुसार, लॉकर में रखी चीजों के लिए बैंक की जिम्मेदारी सालाना किराए के 100 गुना तक ही होती है। यानी अगर लॉकर का किराया 5,000 रुपये सालाना है, तो बैंक की अधिकतम जिम्मेदारी सिर्फ 5 लाख रुपये तक होगी। जबकि लॉकर में आपने अगर 100 ग्राम सोना रखा है, तो उसकी आज की कीमत लगभग 15 लाख रुपये है।
यानी अगर कोई नुकसान होता है, तो लॉकर रखने वाले को बड़ा जोखिम उठाना पड़ सकता है। हालांकि इंश्योरेंस इस कमी को पूरा कर सकता है, लेकिन बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास 25,000 से 34,600 टन सोना है। आज की कीमत के हिसाब से इसकी वैल्यू लगभग 3.8 ट्रिलियन से 5.2 ट्रिलियन डॉलर के बीच है, जो लगभग भारत की पूरी जीडीपी के बराबर है।
Disclaimer : यहां हमने गोल्ड के प्रदर्शन और एक्सपर्ट से बात चीत के आधार पर जानाकरी दी है, यह निवेश की सलाह नहीं है। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार भी नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।
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