इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग (FY 2025-26) शुरू हो चुकी है। ऐसे में 20 लाख रुपए या उससे ज्यादा सालाना सैलरी पाने वाले लोग अगर टैक्स बचाने के का सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है| इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि टैक्सपेयर को Old Tax Regime और New Tax Regime में से सही विकल्प चुनना चाहिए।
कई बार कम टैक्स स्लैब वाला New Regime फायदेमंद साबित होता है, जबकि ज्यादा डिडक्शन्स और एक्सेम्प्शंस लेने वालों के लिए Old Regime बेहतर हो सकता है। इसलिए अपनी इनकम , इंवेस्टमेंट्स और डिडक्शन्स को देखकर सही फैसला लेना जरूरी है।
Old Tax Regime या New Tax Regime में कौन बेहतर?
रिपोर्ट के मुताबिक, 20 लाख सालाना कमाने वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन सा टैक्स रिजीम चुना जाए। New Tax Regime में टैक्स स्लैब कम हैं, लेकिन इसमें डिडक्शन्स और एक्सेम्प्शंस बहुत सीमित हैं। वहीं Old Tax Regime में कई तरह की टैक्स छूट मिलती है।अगर किसी व्यक्ति की कुल डिडक्शन्स करीब 7.08 लाख रुपए से ज्यादा नहीं हैं, तो New Tax Regime ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है। लेकिन अगर आप HRA, 80C, NPS, होम लोन और हेल्थ इन्शुरन्स जैसी बड़ी डिडक्शन्स लेते हैं, तो Old Regime बेहतर हो सकता है।
- New Tax Regime में भी कुछ राहत मिलती है। इसमें 75,000 का स्टैण्डर्ड डिडक्शन मिलता है। इसके अलावा employer contribution to NPS पर Section 80CCD(2) के तहत basic salary का 14% तक डिडक्शन लिया जा सकता है। वहीं let-out property पर home loan interest deduction का फायदा भी मिलता है।
- दूसरी तरफ Old Tax Regime में ज्यादा टैक्स बचाने के मौके मिलते हैं। इसमें House Rent Allowance (HRA), Leave Travel Allowance (LTA), बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी छूट और मोबाइल/इंटरनेट खर्च जैसी राहत शामिल हैं।
इसके अलावा Section 80C के तहत 1.5 लाख तक की टैक्स छूट ली जा सकती है। इसमें EPF, PPF, ELSS, NSC और होम लोन का मूल भुगतान शामिल होता है। हेल्थ इन्शुरन्सपर भी अलग टैक्स छूट मिलती है। NPS में निवेश पर अतिरिक्त 50,000 तक का फायदा मिलता है।
| विशेषता / विवरण | Old Tax Regime | New Tax Regime |
| टैक्स स्लैब और दरें | टैक्स दरें अधिक हैं, लेकिन टैक्स बचाने के कई विकल्प मिलते हैं। | टैक्स स्लैब कम और आसान हैं, लेकिन डिडक्शन्स बेहद सीमित हैं। |
| स्टैण्डर्ड डिडक्शन | ₹50,000 (या सामान्य नियम अनुसार) | ₹75,000 |
| मुख्य टैक्स छूट (Exemptions) | HRA, LTA, बच्चों की पढ़ाई, मोबाइल/इंटरनेट खर्च आदि शामिल। | उपलब्ध नहीं हैं (केवल Let-out property पर होम लोन ब्याज में छूट संभव)। |
| निवेश पर छूट (Deductions) | Section 80C (₹1.5 लाख तक: EPF, PPF, ELSS, होम लोन मूलधन), 80D (हेल्थ इन्शुरन्स), NPS (अतिरिक्त ₹50,000) | उपलब्ध नहीं हैं। |
| NPS (Employer Contribution) | नियमों के अनुसार | Section 80CCD(2) के तहत Basic Salary का 14% तक डिडक्शन। |
| ₹20 लाख सैलरी पर टैक्स (उदाहरण) | करीब ₹3.02 लाख | करीब ₹1.92 लाख |
| टैक्स बचत (₹20 लाख पर) | - | करीब ₹1.09 लाख की सीधी बचत |
| किसे कौन सा चुनना चाहिए? | यदि आपके कुल डिडक्शन्स ₹7.08 लाख से ज़्यादा हैं। | यदि आपके कुल डिडक्शन्स ₹7.08 लाख से कम हैं। |
20 लाख सैलरी पर कितना टैक्स बच सकता है?
ऐसे मामले में New Tax Regime के तहत कुल टैक्स देनदारी करीब 1.92 लाख बनती है। वहीं Old Tax Regime में टैक्स करीब 3.02 लाख तक पहुंच जाता है। यानी इस उदाहरण में New Regime चुनने पर करीब 1.09 लाख की बचत हो सकती है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति की डिडक्शन्स काफी ज्यादा हैं, तो Old Regime ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। इसलिए हर टैक्सपेयर को अपनी सेलरी स्ट्रक्चर और इंवेस्टमेंट्स के हिसाब से कैलकुलेशन करनी चाहिए।
एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि सैलरी स्ट्रक्चर में एम्प्लायर NPS कंट्रीब्यूशन और टैक्स -फ्री अल्लोवान्सेस को सही तरीके से शामिल करना चाहिए। साथ ही हर साल दोनों टैक्स रिजीम की तुलना करके फैसला लेना बेहतर रहता है।
Read more news like this on hindi.etnownews.com

