Tatkal Ticket Booking New Rule Explained: भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकटों की बुकिंग व्यवस्था को दिन ब दिन सख्त करती जा रही है। हाल ही में रेलवे ने तत्काल टिकट की बुकिंग के लिए यात्री की आधार वैरिफिकेशन को अनिवार्य घोषित कर दिया था।
अब एक नया नियम रेलवे लेकर आ रहा है। जी हां, अब तत्काल टिकट की बुकिंग और सख्त होने जा रही है।
Central Railway (CR) ने भारतीय रेल के तत्काल टिकट प्रणाली में 6 दिसंबर से एक बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि यात्री हितों से जुड़ा एक निर्णायक कदम है, जिसका उद्देश्य तत्काल टिकटों की बुकिंग में होने वाली फर्जीवाड़े, बॉट्स के जरिए टिकट पर कब्जा और अनाधिकृत एजेंटों की धांधली पर रोक लगाना है। अब तत्काल टिकट तभी जारी होगा, जब यात्री द्वारा नए नियम को अपनाया जाएगा। यह नया सिस्टम कैसे काम करेगा, क्यों जरूरी है, यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, और रेलवे क्या बदलाव आगे और ला सकती है, इस बारे में यहां विस्तार से बता रहे हैं-
तत्काल टिकट से जुड़ा क्या है नया नियम?
रेल मंत्रालय ने आखिरी वक्त पर बुकिंग सुविधा का गलत इस्तेमाल रोकने और ज्यादा डिमांड वाले टिकटों तक सही पहुंच पक्का करने के लिए नया नियम शुरू किया है। ये है OTP आधारित व्यवस्था, जिसे 17 नवंबर को पायलट आधार पर शुरू किया गया था। इसे पहले कुछ ट्रेनों में लागू किया गया और बाद में इसे बढ़ाकर 52 कर दिया गया। मंत्रालय ने कहा कि अगले कुछ दिनों में बाकी सभी ट्रेनों के लिए भी यही व्यवस्था शुरू किया जाएगा।Tatkal Ticketing: हमेशा विवादों में क्यों रहा?
तत्काल टिकट प्रणाली भारतीय रेल की सबसे लोकप्रिय और तनावपूर्ण सेवाओं में से एक है। रोज लाखों यात्री अचानक यात्रा की जरूरत में इस सुविधा का उपयोग करते हैं। लेकिन वर्षों से इस प्रणाली में कई तरह की शिकायतें आती रही हैं। जैसे कि तत्काल विंडो खुलते ही (AC के लिए सुबह 10 बजे, Non-AC के लिए 11 बजे) टिकट सिर्फ 5 से 30 सेकंड में योग्यता सूची से गायब हो जाते थे। इस तरह की बुकिंग सामान्य यात्री नहीं कर पाता है। ये आम तौर पर या तो तकनीकी जानकार लोग, या फिर अनाधिकृत एजेंट तेज गति वाले सिस्टम, स्क्रिप्ट या बॉट्स का उपयोग करके ये टिकट पकड़ लेते थे।अक्सर ऐसा पाया गया कि कुछ एजेंट जानबूझकर एक ही मोबाइल नंबर या कई पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर कई टिकट बुक कर लेते थे। कुछ मामलों में यात्रियों के नाम से टिकट भी फर्जी तरीके से बुक किए जाते थे। इतना ही नहीं, जब टिकट फर्जी तरीके से बुक हो जाते हैं, तो असली यात्री को टिकट नहीं मिल पाता। बाद में वही टिकट ऊंचे दाम पर बेचे जाते थे। लाखों शिकायतें IRCTC और रेलवे तक जातीं, लेकिन असली समस्या पहचान की थी। ये समस्याएं लगातार संकेत दे रही थीं कि तत्काल टिकटिंग में किसी सुरक्षित पहचान प्रक्रिया की आवश्यकता है।
बिना OTP वैरिफिकेशन के नहीं मिलेगी तत्काल टिकट
Central Railway ने घोषणा की है कि 6 दिसंबर से तत्काल टिकट बिना OTP वैरिफिकेशन के जारी नहीं होगा। यह प्रणाली तीनों माध्यमों पर लागू होगी। वे हैं - PRS counters (यानी स्टेशन पर काउंटर), अधिकृत एजेंट, IRCTC वेबसाइट और IRCTC मोबाइल ऐप। अब चाहे टिकट ऑनलाइन ले रहे हों या ऑफलाइन, OTP वैरिफिकेशन अनिवार्य होगा।नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
रेलवे का बयान स्पष्ट करता है कि प्रक्रिया सरल होगी, जो कि इस प्रकार काम करेगी:1. टिकट बुकिंग की डिटेल्स भरनी होगी। यानी यात्री अपना नाम, उम्र, ट्रैवल डिटेल्स, ट्रेन/कोटा आदि भरता है। इस दौरान मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
2. इसके बाद एक OTP जनरेट होगा। बुकिंग प्रोसेस शुरू होते ही रेलवे का सिस्टम स्वचालित रूप से एक OTP जनरेट करेगा।
3. मोबाइल पर OTP उस नंबर पर SMS के रूप में आएगा, जिसे यात्री ने दर्ज किया है।
4. यात्री इस OTP को IRCTC ऐप/वेबसाइट/एजेंट सिस्टम/PRS स्क्रीन में दर्ज करें।
5. यदि OTP मेल खाता है, तो बुकिंग भी आगे नहीं बढ़ेगी। OTP गलत है या समय पर दर्ज नहीं हो पाएगा, तो बुकिंग अस्वीकार हो जाएगी।
6. OTP सफल होने के बाद ही पैसा लिया जाएगा और टिकट कंफर्म होकर जारी होगा।
क्या यह नियम पूरे देश में लागू?
अभी यह बदलाव Central Railway की कुछ चुनिंदा ट्रेनों में लागू होगा। लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि यह सफल रहा, तो ये व्यवस्था पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में इसे लागू किया जा सकता है। यह रेलवे की लंबी अवधि सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। भारतीय रेलवे का यह कदम तत्काल बुकिंग को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ी पहल है। तत्काल टिकटों में धांधली वर्षों से सबसे बड़ी समस्या थी। OTP आधारित वैरिफिकेशन एक डिजिटल सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देगा।(Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)
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