No Cost EMI: आजकल नो कॉस्ट ईएमआई का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर मोबाइल स्टोर्स तक हर जगह ये ऑफर लोगों को लुभा रहा है। 'अभी खरीदो, बाद में आराम से चुकाओ' वाली यह स्कीम पहली नजर में बेहद फायदेमंद लगती है, क्योंकि इसमें ब्याज न देने का दावा किया जाता है।
लेकिन क्या सच में यह डील उतनी ही आसान और सस्ती है, जितनी दिखाई जाती है?
असल में, नौ कॉस्ट ईएमआई का खेल उतना सीधा नहीं है, जितना विज्ञापनों में दिखाया जाता है। इसके पीछे ऐसा कैल्कुलेशन छिपा होता है, जिसमें ग्राहक सीधे ब्याज नहीं देता, लेकिन फिर भी किसी न किसी रूप में अतिरिक्त खर्च उठा ही लेता है। यानी 'नौ कॉस्ट' का टैग कई बार सिर्फ एक स्मार्ट मार्केटिंग ट्रिक साबित होता है, जिसे समझना हर खरीदार के लिए जरूरी है।
क्या है नो कॉस्ट EMI का गणित?
मान लीजिए एक फोन की कीमत 30,000 रुपये है। कंपनी उस पर 3,000 रुपये का डिस्काउंट दे रही है। अगर आप 'नो कॉस्ट ईएमआई' चुनते हैं, तो कंपनी आपको वह डिस्काउंट नहीं देगी। वह 3,000 रुपये बैंक को ब्याज के रूप में दे दिए जाते हैं और आपसे पूरी कीमत यानी 30,000 रुपये किस्तों में वसूली जाती है। इस तरह से डिस्काउंट को ब्याज बदल दिया जाता है।
वहीं, कई बार रिटेलर सामान की कीमत में पहले से ही ब्याज का हिस्सा जोड़ देते हैं। 27,000 रुपये का सामान आपको 30,000 रुपये में 'नो कॉस्ट ईएमआई' पर दिया जाता है, जिससे आपको लगता है कि आप ब्याज नहीं दे रहे और इस तरह से कीमत में ब्याज जोड़कर वसूल लिया जाता है।
आपका बजट बिगाड़ने वाले हिडन चार्जेस
प्रोसेसिंग फीस: अधिकतर बैंक इस सुविधा के लिए 199 से लेकर 500 रुपये तक की फाइल चार्ज या प्रोसेसिंग फीस लेते हैं।
GST का झटका: यह सबसे जरूरी प्वाइंट है। भले ही कंपनी आपका ब्याज माफ कर दे, लेकिन बैंक जो ब्याज (मान लीजिए 15 फीसदी) काटता है, उस ब्याज की राशि पर आपको 18 फीसदी GST देना ही पड़ता है। यह पैसा आपकी जेब से अतिरिक्त जाता है।
पेनाल्टी: अगर आप एक भी किस्त चूक गए, तो बैंक भारी भरकम लेट फीस और ब्याज वसूलता है, जो आपके 'नो कॉस्ट' के फायदे को पूरी तरह खत्म कर देता है।
लेने से पहले यह कैलकुलेशन जरूर देखें
प्रोडक्ट की कीमत: 50,000 रुपये
अवधि: 6 महीने
बैंक ब्याज (अनुमानित): 3,000 रुपये (जो डिस्काउंट के रूप में काट लिया गया)
GST (18% ब्याज पर): 540 रुपये
प्रोसेसिंग फीस: 250 रुपये + GST
यहां आपको 50,000 रुपये के सामान के लिए असल में लगभग 51,000 रुपये या उससे ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं।
ध्यान दें - कब लें और कब ना लें?
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