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NPS New Withdrawal Rules: एनपीएस में सिस्टमैटिक विड्रॉल कैसे करता है काम; क्या है SLW और SUR? FULL Details

NPS New Withdrawal Rules: एनपीएस में सिस्टमैटिक विड्रॉल कैसे करता है काम; क्या है SLW और SUR? FULL Details

NPS New Withdrawal Rules: रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अब पहले से कहीं ज्यादा फायदेमंद हो गया है। पेंशन नियामक PFRDA ने विड्रॉल के नियमों में जो बदलाव (nps new rules) किए हैं, वे निवेशकों को उनकी जमा पूंजी पर बेहतर नियंत्रण और अधिक रिटर्न दिलाने में मदद करेंगे।

नए नियमों का सबसे बड़ा आकर्षण 'सिस्टमैटिक लम्पसम विड्रॉल' (SLW) सुविधा है, जो रिटायरमेंट के बाद के जीवन को आर्थिक रूप से अधिक स्थिर बनाएगी।

क्या है नया नियम और कैसे काम करेगा?


अब तक के नियमों के अनुसार, जब कोई सब्सक्राइबर 60 वर्ष का होता था, तो उसे अपने कुल फंड का 60% हिस्सा एकमुश्त निकालना पड़ता था। शेष 40% हिस्सा अनिवार्य रूप से एन्युटी (Annuity) खरीदने में इस्तेमाल होता था, जिससे मासिक पेंशन मिलती है।

नए SLW (Systematic Lump Sum Withdrawal) नियम के तहत, अब निवेशक उस 60% हिस्से को एक साथ निकालने के बजाय मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना किस्तों में निकाल सकते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे म्यूचुअल फंड में SWP (Systematic Withdrawal Plan) काम करता है। निवेशक यह विकल्प चुन सकते हैं कि उन्हें अगले 15-25 सालों तक (75 वर्ष की आयु तक) अपनी रकम किस अंतराल पर चाहिए।

निवेशकों को क्यों होगा 'डबल मुनाफा'?


इस बदलाव से निवेशकों को दो बड़े वित्तीय लाभ मिलेंगे:

कंपाउंडिंग का निरंतर लाभ: जब आप पूरी रकम एक साथ निकाल लेते हैं, तो उस पर मिलने वाला ब्याज बंद हो जाता है। लेकिन SLW विकल्प चुनने पर, जो पैसा आपके NPS खाते में बचा रहता है, वह मार्केट में निवेशित रहता है। इससे उस बचे हुए पैसे पर आपको रिटायरमेंट के बाद भी रिटर्न मिलता रहता है।

बाजार की गिरावट से सुरक्षा: अगर रिटायरमेंट के समय शेयर बाजार गिरा हुआ है, तो एक साथ पैसा निकालने पर आपको घाटा हो सकता है। किस्तों में पैसा निकालने से आप 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का लाभ उठा पाते हैं और मार्केट की अस्थिरता का असर आपके कुल कॉर्पस पर कम पड़ता है।

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कैश फ्लो और लिक्विडिटी में सुधार


रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता मासिक खर्चों की होती है। एन्युटी से मिलने वाली पेंशन अक्सर महंगाई दर के मुकाबले कम होती है। ऐसे में 60% वाले हिस्से से मिलने वाली 'सिस्टमैटिक किस्त' एक अतिरिक्त आय (Secondary Income) का काम करेगी। इससे निवेशकों के पास अपनी जरूरतों के हिसाब से पैसा निकालने की आजादी होगी।

टैक्स का पहलू


NPS से निकाला गया 60% हिस्सा वर्तमान नियमों के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री है। SLW के माध्यम से निकाली जाने वाली किस्तों पर भी टैक्स छूट का लाभ मिलता रहेगा, जो इसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे विकल्पों से बेहतर बनाता है, जहां मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है।

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