मिडिल ईस्ट में एक महीने से ज्यादा समय से जारी तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका असर अब आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखने लगा है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद जनता को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी इस्लामाबाद और देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रांत में अगले एक महीने तक सरकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त रहेगा। दरअसल, देर रात लिए गए फैसले में पेट्रोल की कीमतों में 42.7% और डीजल में 54.9% की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात ऐसे बने कि पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोग जल्दबाजी में टैंक फुल कराने पहुंचने लगे।
गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि शनिवार से अगले 30 दिनों तक इस्लामाबाद में आम जनता के लिए सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाएं मुफ्त रहेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले से सरकार पर करीब 35 करोड़ रुपये (लगभग 12.5 लाख डॉलर) का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
कितने में मिल रहा 1 लीटर पेट्रोल-डीजल
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण लगातार गहरा रहे एनर्जी संकट के बीच पाकिस्तान में अचानक पेट्रोल-डीजल के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए गए हैं। पाक सरकार के इस फैसले से कराची में लोग काफी नाराज नजर आए। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक कीमतों में बदलाव के बाद अब यहां एक लीटर पेट्रोल करीब 458 रुपये और डीजल के दाम प्रति लीटर 520 रुपये तक पहुंच गए हैं। लोगों का कहना है कि इस तेज बढ़ोतरी ने खासकर रोज कमाने-खाने वालों की कमर तोड़ दी है।
एक स्थानीय शख्स के हवाले से एजेंसी ने बताया कि पहले ही करीब 55 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी और अब अचानक 137 रुपये और बढ़ा दिए गए, जिससे हालात और खराब हो गए हैं। लोगों का यह भी कहना है कि गैस के दाम बढ़ने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगी हुई है और लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।
वहीं, पाकिस्तान के सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रांत पंजाब में भी सरकार ने राहत के कदम उठाते हुए सरकारी बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया माफ कर दिया है, साथ ही ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए टारगेटेड सब्सिडी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों से अपील की है कि बढ़ी हुई लागत का बोझ यात्रियों और उपभोक्ताओं पर न डालें और भरोसा दिलाया कि हालात सुधरते ही आम लोगों को आर्थिक दबाव से राहत दी जाएगी।
वहीं, सिंध प्रांत में कराची सरकार ने भी इसी तरह के कदम उठाते हुए बाइक चालकों और छोटे किसानों के लिए सब्सिडी का ऐलान किया है। इस बीच, ईंधन की बचत के लिए सरकार ने कई सख्त कदम भी लागू किए हैं, जिनमें सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में चार दिन काम करने का नियम, स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाना और कुछ क्लासेज को ऑनलाइन करना शामिल है।
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान एक लोअर-मिडिल इनकम देश है, जहां करीब 24 करोड़ की आबादी में से लगभग 25% लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। सरकार ने मार्च की शुरुआत में ही ईंधन की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की थी, लेकिन उसके बाद कई हफ्तों तक अतिरिक्त बढ़ोतरी से बचती रही। सरकार का कहना था कि वह बढ़ी हुई लागत को खुद वहन कर सकती है और इसका बोझ आम जनता पर नहीं डालेगी।
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