हेल्थ इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी है। आजकल मार्केट में कई कंपनियों के मेडिक्लेम मौजूद हैं। किसी भी मेडिक्लेम को लेने से पहले आपको कई बातों का ध्यान होना जरूरी है। क्योंकि अक्सर ये देखने में आता है, कि हेल्थ इंश्योरेंस होने के बावजूद जरूरत के समय ये आपको नहीं मिलता है।
ऐसे में एक बात जरूर ध्यान में रखें, कि अगर आपको पहले से कोई बीमारी है तो क्या हेल्थ इंश्योरेंस मिल सकता है? 'प्री-एक्सिस्टिंग कंडीशन' को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में ये जरूर जान लें कि क्या नए नियमों के बाद कंपनियां ऐसी बीमारियों को कैसे कवर करती हैं? ज्यादा प्रीमियम, वेटिंग पीरियड या अलग पॉलिसी।ऐसे में जरूर जानें आसान तरीका। जिससे आप हेल्थ इंश्योरेंस का पूरा फायदा उठा सकें।
क्या होती है प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी
करवा रहे हैं तो उसे प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज कहा जाता है। यहां इस बात का ध्यान दें, कि ऐसी बीमारी आमतौर पर तभी कवर होगी, जब 1 से 4 साल का वेटिंग पीरियड खत्म होता है। ऐसे में पॉलिसी खरीदने वालों को इसीलिए अपनी हेल्थ कंडीशन के बारे में हर जानकारी बीमा कंपनी को जरूर बतानी चाहिए। जैसे अगर आपको टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दिल से जुड़ी बीमारियां या दूसरी गंभीर बीमारियों के बारे में बताना चाहिए। इसके लिए प्रीमियम ज्यादा देना पड़ता है।
इकोनॉमिक टाइम्स की वेबसाइट के अनुसार, पहले से मौजूद बीमारियों के मामले में, स्वास्थ्य बीमा कंपनियां आमतौर पर पॉलिसी जारी करने से पहले प्री-एंट्रेंस हेल्थ चेक-अप की मांग करती हैं। चेकअप पहले से मौजूदा बीमारी की गंभीरता को देखता है।उच्च जोखिम वाले मामलों को खारिज करने के लिए किया जाता है। चेक-अप के परिणामों के आधार पर, मेडिकल अंडरराइटिंग की जाती है। इसके बाद ही पॉलिसी जारी की जाती है। प्री-एंट्रेंस हेल्थ चेक-अप वास्तव में अच्छी होती है, क्योंकि, पहले से मौजूद बीमारी की गंभीरता को सुनिश्चित करने के जिम्मेदारी बीमाकर्ता की होती है।
पॉलिसी का प्रीमियम बढ़ा सकती है कंपनी
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस की खासियतें
- एकमुश्त भुगतान: इलाज का खर्च चाहे जितना हो।इसमें बीमा कंपनी तय रकम देती है।
- कम वेटिंग पीरियड: सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस की तुलना में इसमें वेटिंग पीरियड की अवधि कम होती है।
- टैक्स में राहत: इस बीमा पर चुकाए गए प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80D के तहत टैक्स छूट मिलती है।
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