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RBI Annual Report 2026: डिजिटल रुपया का दायरा बढ़ाने की तैयारी, ये तरीके अपनाएगा रिजर्व बैंक

RBI Annual Report 2026: डिजिटल रुपया का दायरा बढ़ाने की तैयारी, ये तरीके अपनाएगा रिजर्व बैंक

RBI Annual Report 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट (2025-26) में डिजिटल रुपया को लेकर एक रोडमैप पेश किया है। रिजर्व बैंक की योजना इसके दायरे को बढ़ाने की है, जिसे वेलफेयर पेमेंट्स के जरिये किया जाएगा।

इस डिजिटल रुपया का इस्तेमाल इन तरह के पेमेंट्स में बढ़ाने का रिजर्व बैंक प्रयास करेगा। साथ ही क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन में इसके उपयोग का परीक्षण करने की भी रिजर्व बैंक तैयारी कर रही है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब भारत वैश्विक स्तर पर होने वाले पेमेंट्स में डिजिटल रुपया की भूमिका को मजबूत करना चाहता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरबीआई ने गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के कई पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चलाए हैं, जहां लाभार्थियों को डिजिटल रुपये के माध्यम से खाद्य सब्सिडी प्रदान की गई।

डीबीटी स्कीम्स में प्रोग्रामेबिलिटी का फायदा

रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने संस्थागत स्तर पर सार्वजनिक संपत्ति के सही और उत्पादक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कई सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर अलग-अलग डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रांसफर (DBT) स्कीम्स में पायलट प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है।


इस प्रक्रिया में डिजिटल रुपया की प्रोग्रामेबिलिटी का खास फायदा उठाया गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी या सरकारी सहायता जिस खास काम के लिए बांटी गई है, वह उसी पर खर्च हो। आरबीआई के इस नए कदम से न सिर्फ डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सरकारी वेलफेयर स्कीम्स में पारदर्शिता और सटीकता भी काफी हद तक बढ़ जाएगी।

वेलफेयर पेमेंट्स पर फोकस

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार वेलफेयर पेमेंट्स को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए देश भर में कम से कम 10 पायलट प्रोजेक्ट्स चला रही है, ताकि यह जांचा जा सके कि क्या डिजिटल रुपया के जरिए सरकारी मदद सीधे और सही तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाई जा सकती है।

हालांकि, रिजर्व बैंक के वार्षिक आंकड़ों से यह भी पता चला है कि आम जनता के बीच रिटेल डिजिटल रुपये का चलन कम हुआ है। 31 मार्च 2026 तक बाजार में रिटेल ई-रुपये का सर्कुलेशन घटकर 7.71 अरब रुपये रह गया, जो इससे ठीक एक साल पहले 10.16 अरब रुपये था।

क्रॉस बॉर्डर के लिए वैश्विक तैयारी

डिजिटल रुपया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने और सीमा-पार लेन-देन को आसान बनाने के लिए आरबीआई लगातार बड़े कदम उठा रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक ने सिंगापुर की मॉनेटरी अथॉरिटी के साथ डिजिटल एसेट्स को लेकर एक बड़ा समझौता किया है।


इसके साथ ही, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर कुछ नए पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू करने पर भी बातचीत चल रही है। इसके अतिरिक्त, आरबीआई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया है कि वह बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के नेतृत्व में चलने वाली कई बहुपक्षीय वैश्विक पहलों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

आरबीआई क्लाउड प्लेटफॉर्म का पहला चरण शुरू

एक अन्य बड़ी घोषणा में, आरबीआई ने वित्तीय कंपनियों के लिए अपना खुद का क्लाउड प्लेटफॉर्म बीटा मोड में लाइव कर दिया है, जिसकी शुरुआत फिलहाल 9 कंपनियों के साथ की गई है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में इस तरह की आधुनिक तकनीक शुरू करने वाला आरबीआई शुरुआती बैंकों में से एक है।

आरबीआई ने बताया कि उसके इंडियन फाइनेंशियल सेक्टर (IFS) क्लाउड के पहले फेज का काम काफी विकसित स्तर पर है, जिसमें बुनियादी क्लाउड सेवाएं दी जा रही हैं। इसके सफल होने के बाद जल्द ही दूसरे फेज की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत वित्तीय सेक्टर के लिए अधिक एडवांस क्लाउड सर्विसेज पेश की जाएंगी।

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