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RBI MPC Highlights : एमपीसी बैठक के बाद आम आदमी के लिए क्या बदला? गवर्नर संजय मल्होत्रा की 10 बड़ी बातें

RBI MPC Highlights : एमपीसी बैठक के बाद आम आदमी के लिए क्या बदला? गवर्नर संजय मल्होत्रा की 10 बड़ी बातें

RBI MPC Highlights : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आज 8 अप्रैल 2026 को रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच, गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने बेंचमार्क रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित नीति की 10 मुख्य बातें

1. रेपो रेट और स्टेंस (Repo Rate & Stance)
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। बैंक ने अपना रुख 'Neutral' (न्यूट्रल) बनाए रखा है, जिसका मतलब है कि बैंक आने वाले समय में आंकड़ों के आधार पर किसी भी दिशा में कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है।

2. जीडीपी और ग्रोथ (GDP Outlook)
- नई सीरीज के आधार पर जीडीपी ग्रोथ 7.6% रही है (जो पहले अनुमानित 7.4% से बेहतर है)।
- FY27 (अगला साल): नए वित्त वर्ष के लिए विकास दर 6.9% रहने का अनुमान है।

3. महंगाई का अनुमान (Inflation Forecast)
पूरे साल (FY27) के लिए महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान है। आरबीआई अब से Core CPI (कोर महंगाई) का अनुमान भी जारी करेगा, जो इस साल 4.4% रहने की उम्मीद है। दूसरी तिमाही (Q2FY27) के लिए महंगाई का अनुमान 4% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया गया है।

तिमाही अनुमान
Q1: 4.0% | Q2: 4.4% | Q3: 5.2% | Q4: 4.7%

4. ग्लोबल रिस्क और सप्लाई शॉक
गवर्नर ने आगाह किया कि दुनिया भर में जारी तनाव से बाहरी मांग कम हो सकती है और Remittances (विदेशों से आने वाला पैसा) घट सकता है| उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सप्लाई चेन सुधारने में देरी हुई, तो 'सप्लाई शॉक' आगे चलकर 'डिमांड शॉक' में बदल सकता है, जिससे देश की आर्थिक ग्रोथ प्रभावित होगी।



5. डॉलर की मजबूती: वैश्विक उथल-पुथल की वजह से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।
6. विकास और मांग के मुख्य कारक
सर्विस सेक्टर में तेजी, जीएसटी (GST) युक्तिकरण से खपत बढ़ना और बैंकों व कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर।

7. विदेशी क्षेत्र और व्यापारिक जोखिम
शिपिंग रूट्स में रुकावट और माल ढुलाई (Freight) व बीमा खर्च बढ़ने से निर्यात प्रभावित हो सकता है। वैश्विक विकास धीमा होने पर विदेशों से आने वाले पैसे में कमी आ सकती है।

8. नीति का आधार: 'रुको और देखो' (Wait and Watch)
आरबीआई का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है और पिछले संकटों की तुलना में झटकों को सहने के लिए बेहतर तैयार है। हालांकि, ग्लोबल सप्लाई शॉक को देखते हुए सावधानी जरू

9. खेती और मौसम का जोखिम
अच्छी रबी फसल से खाने-पीने की चीजों के दाम कम रहने की उम्मीद है, लेकिन 'अल नीनो' (El Niño) के कारण अगर मानसून खराब हुआ, तो महंगाई बढ़ सकती है।

10. सप्लाई शॉक और सावधानी
भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों को देखते हुए आरबीआई ने फिलहाल 'रुको और देखो' (Wait and Watch) की नीति अपनाई है।

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