Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों, रुपये की रिकॉर्ड गिरावट और बढ़ती महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया।
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में दिखा और सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,600 के नीचे फिसल गया। वहीं, निफ्टी 50 भी करीब 190 अंक लुढ़ककर 23,450 के नीचे कारोबार करता दिखा।
बाजार की घबराहट का अंदाजा इंडिया VIX से लगाया जा सकता है, जो 1% से ज्यादा चढ़कर 18.93 के करीब पहुंच गया। Tata Steel, Eternal, BEL, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, SBI और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि IT सेक्टर में TCS और Infosys ने मामूली मजबूती दिखाई, लेकिन इससे बाजार की कमजोरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव रुपये की लगातार गिरावट का रहा। भारतीय मुद्रा बुधवार को डॉलर के मुकाबले 96.8650 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। ईरान-यूएस तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारत के आयात बिल और ट्रेड डेफिसिट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों को भी सतर्क कर रहा है।
बॉन्ड यील्ड्स ने बढ़ाया दबाव
अमेरिका की 30 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.20% तक पहुंच गई, जो 2007 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। 10 साल की यील्ड भी 4.67% के करीब बनी हुई है। ऊंची बॉन्ड यील्ड्स निवेशकों को इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की तरफ आकर्षित करती हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है।
ईरान-अमेरिका तनाव बना बड़ा रिस्क
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होगा, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। ईरान की ओर से लगातार आक्रामक बयानबाजी जारी है। इससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल और WTI 104 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव की वजह से सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने वाली है, जिसका असर बाजार पर साफ दिख रहा है।
FII की बिकवाली और ग्लोबल मार्केट की कमजोरी
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 2,457 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इससे पहले तीन सत्रों की खरीदारी के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि विदेशी पैसा बाजार को सहारा देगा, लेकिन बिकवाली की वापसी ने sentiment कमजोर कर दिया। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.5% टूटा, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा फिसला। वॉल स्ट्रीट पर भी Nasdaq और S&P 500 लाल निशान में बंद हुए। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
निवेशकों के लिए कैसी है आगे की राह?
विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी के लिए 23,300-23,400 का स्तर बेहद अहम सपोर्ट है। अगर यह टूटता है तो इंडेक्स 23,000 तक जा सकता है। वहीं, मजबूती लौटाने के लिए निफ्टी को 23,900 के ऊपर टिकना होगा। फिलहाल बाजार में सतर्कता ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।
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