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Stock Markets Decline: हर साल 10-20% गिरावट आम-पॉजिटिव रिटर्न जल्द, क्या कहता है गिरावट का इतिहास

Stock Markets Decline: हर साल 10-20% गिरावट आम-पॉजिटिव रिटर्न जल्द, क्या कहता है गिरावट का इतिहास

भारतीय शेयर बाजार खासकर BSE Sensex का पिछले 45 से अधिक साल का इतिहास निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा सबक देता है। बाजार में गिरावट सामान्य है, असामान्य नहीं। इतिहास बताता है कि हर साल बाजार में 10 फीसदी से 20 फीसदी तक की गिरावट लगभग तय होती है।

Fundsindia की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 45 सालों में सिर्फ 5 साल (1984, 2014, 2017, 2023 और 2025) ही ऐसे रहे, जब इंट्रा ईयर गिरावट 10 फीसदी से कम रही। यानी लगभग हर साल बाजार ने निवेशकों को गिरावट का सामना कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ बाजारों को लगभग हर साल 10-20 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा, वहीं 4 में से 3 साल फिर भी पॉजिटिव रिटर्न के साथ खत्म हुए। इससे यह पता चलता है कि ये गिरावटें आमतौर पर कम समय के लिए होती थीं और उसी साल के भीतर ही बाजार फिर से संभल जाते थे। अगर मौजूदा स्थिति को देखें, तो बाजार अपने पीक से करीब 16 फीसदी नीचे है। यह गिरावट भी इतिहास के हिसाब से बिल्कुल सामान्य दायरे में आती है। यानी इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

Fundsindia की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 45 सालों में सिर्फ 5 साल (1984, 2014, 2017, 2023 और 2025) ही ऐसे रहे, जब साल के दौरान गिरावट 10 फीसदी से कम रही। -Fundsindia

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60 फीसदी तक की बड़ी गिरावटें काफी कम

अब सवाल आता है कि बड़ी गिरावट (30 फीसदी या उससे ज्यादा) कितनी आम है? इतिहास को देंखेंतो 30 फीसदी से 60 फीसदी तक की बड़ी गिरावटें काफी कम होती हैं और आमतौर पर 7-10 साल में एक बार देखने को मिलती हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि ऐसी बड़ी गिरावटों के बाद भी भारतीय बाजार लंबे समय में हमेशा रिकवर हुआ है और आगे बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण कंपनियों की कमाई (earnings growth) में बढ़ोतरी है।

कई साल ऐसे हैं जहां Sensex ने 50 फीसदी से 90 फीसदी तक का शानदार रिटर्न दिया, जैसे 1991, 2003 और 2009 जैसे साल। वहीं कुछ सालों में भारी गिरावट भी देखने को मिली, जैसे 2008 में करीब -51 फीसदी और 2020 जैसे समय में भी तेज गिरावट आई।

भारतीय शेयर बाजार खासकर BSE Sensex के ऐतिहासिक डेटा से यह साफ होता है कि 30 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावटें भले ही डरावनी लगें, लेकिन ये स्थायी नहीं होतीं और बाजार समय के साथ रिकवर कर जाता है।

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एक और अहम बात यह सामने आती है कि गिरावट के बाद अक्सर बाजार में जोरदार रिकवरी होती है। उदाहरण के लिए 2008 की बड़ी गिरावट के बाद 2009 में करीब 76 फीसदी की तेजी आई। यह बताता है कि बाजार में गिरावट स्थायी नहीं होती।

2026 (YTD) में भी बाजार लगभग -16% नीचे दिख रहा है, लेकिन इतिहास के हिसाब से यह कोई असामान्य गिरावट नहीं है। पहले भी कई बार बाजार गिरा है और बाद में रिकवर हुआ है।

बाजार की रिकवरी में कितना टाइम

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय शेयर बाजार खासकर BSE Sensex के ऐतिहासिक डेटा से यह साफ होता है कि 30 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावटें भले ही डरावनी लगें, लेकिन ये स्थायी नहीं होतीं और बाजार समय के साथ रिकवर कर जाता है। डेटा के अनुसार 1986 से 2020 तक ऐसे 8 बड़े मौके आए जब Sensex में 30 फीसदी से 60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई। इनमें 2008 की गिरावट सबसे बड़ी रही, जब बाजार करीब -61 फीसदी तक टूट गया था। वहीं 2000 और 1992 में भी 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।

अगर समय की बात करें, तो इन बड़ी गिरावटों में औसतन बाजार को नीचे जाने में करीब 1 साल 1 महीने का समय लगा। इसके बाद रिकवरी में लगभग 1 साल 3 महीने का समय लगा। यानी कुल मिलाकर एक बड़ी गिरावट से पूरी तरह उबरने में औसतन 2 साल 4 महीने का समय लगा।

कुछ मामलों में रिकवरी बहुत तेज भी रही। जैसे 2020 में कोविड के दौरान बाजार सिर्फ 2 महीने में गिरा और करीब 8 महीने में ही पूरी तरह रिकवर हो गया। वहीं 1994-99 के दौरान रिकवरी में सबसे ज्यादा समय लगा, जहां बाजार को पूरी तरह संभलने में करीब 4 साल 10 महीने लगे।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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