Sugar Stocks Crash: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जहां कई सेक्टर्स में मजबूती देखने को मिली, वहीं शुगर सेक्टर के शेयरों में जोरदार बिकवाली ने निवेशकों को चौंका दिया। सरकार ने गुरुवार को अचानक से चीनी निर्यात नीति को 'restricted' से बदलकर 'prohibited' कर दिया है।
यानी अब तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस फैसले का असर शुगर कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखा और कई बड़े स्टॉक्स 4 फीसदी तक टूट गए।
शुगर स्टॉक्स में आई बिकवाली
Balrampur Chini Mills के शेयर करीब 4.5 फीसदी गिरकर 525 रुपये तक फिसल गए। Dhampur Sugar Mills में 4 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी आई और यह 147.55 रुपये तक आ गया। इसके अलावा Dalmia Bharat Sugar, Shree Renuka Sugars और EID Parry जैसे बड़े शेयरों में भी 2 से 3 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।
सरकार ने क्यों लिया यह सख्त फैसला?
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है, लेकिन लगातार दूसरे साल घरेलू उत्पादन खपत से कम रहने का अनुमान है।
सरकार ने पहले 2025-26 सीजन के लिए करीब 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, क्योंकि शुरुआती अनुमान उत्पादन बेहतर होने का था। लेकिन अब गन्ने की पैदावार कमजोर पड़ने और कई राज्यों में मौसम की अनिश्चितता के चलते तस्वीर बदल गई है।
सरकार को आशंका है कि अगर अभी निर्यात जारी रहा तो घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसी वजह से यह रोक लगाई गई है।
कब तक लागू रहेगी रोक?
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा या अगले आदेश तक जारी रहेगा। हालांकि जिन शिपमेंट्स की लोडिंग पहले ही शुरू हो चुकी है, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा यूरोपीय यूनियन और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत होने वाला निर्यात जारी रहेगा। Advance Authorisation Scheme के तहत होने वाले निर्यात को भी छूट दी गई है। अगर 30 सितंबर के बाद इस रोक को आगे नहीं बढ़ाया गया तो नीति अपने आप फिर से restricted श्रेणी में लौट जाएगी।
उत्पादन और मांग का क्या है गणित?
भारत में 2025-26 सीजन में करीब 275 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। पिछले सीजन का लगभग 50 लाख टन ओपनिंग स्टॉक जोड़ने पर कुल उपलब्धता 325 लाख टन बैठती है।
वहीं घरेलू खपत करीब 280 लाख टन रहने का अनुमान है। इसका मतलब सीजन के अंत में स्टॉक सिर्फ 45 लाख टन बचेगा, जो 2016-17 के बाद सबसे निचला स्तर होगा।
आगे और बढ़ सकती है चिंता
सरकार की चिंता सिर्फ मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं है। 2026-27 में El Niño, कमजोर मानसून और मध्य-पूर्व संकट की वजह से उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इससे गन्ना उत्पादन पर और दबाव पड़ सकता है।
इसी जोखिम को देखते हुए सरकार अभी से घरेलू सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है। लेकिन निवेशकों के लिए यह फैसला फिलहाल शुगर स्टॉक्स की मिठास फीकी कर गया है।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।
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