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TDS, TCS new rules : 24Q-26Q की जगह आए 138 और 140 फॉर्म, समझिए आपके लिए क्या बदला?

TDS, TCS new rules : 24Q-26Q की जगह आए 138 और 140 फॉर्म, समझिए आपके लिए क्या बदला?

ए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से देश के टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 और इनकम टैक्स रूल्स 2026 लागू कर दिए हैं। इनकम टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान हो इसके लिए विभाग ने खास AI टूल कर साथी (Kar Saathi) के साथ नई वेबसाइट भी www.incometaxindia.gov.in पेश की है।

इन बदलावों का मकसद आसान टैक्स फाइलिंग, डिजिटल तरीके से कम समय में काम और सिस्टम में गड़बड़ी या भ्रम की गुंजाइश कम करना है। यानी अब लोगों के टैक्स से जुड़े काम पहले के मुकाबले फॉस्ट और आराम से हो सकेंगे।

इन सब में एक और अहम बदलाव TDS सिस्टम को लेकर किया गया है। विभाग ने पुराने Form 24Q और 26Q की जगह अब नए Form 138 और 140 पेश किए हैं। नए फार्म के आने से लोगों के लिए क्या बदला, यहां डिटेल देखें

इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक पुराने TDS फॉर्म 24Q और 26Q की जगह अब नए फॉर्म 138 और 140 लागू हो गए हैं। फॉर्म 138 सैलरी से जुड़े TDS का क्वार्टरली स्टेटमेंट है जिसे कंपनियां या नियोक्ता फाइल करते हैं, जबकि फॉर्म 140 नॉन सैलरी पेमेंट्स जैसे प्रोफेशनल फीस, किराया और कमीशन पर लागू होता है और इसे डिडक्टर्स फाइल करते हैं।



नए फॉर्म्स को ज्यादा स्मार्ट और आसान बनाया गया है, जो TRACES सिस्टम से ऑटो प्रीफिल हो जाते हैं और इनमें रियल टाइम वैलिडेशन, ड्रॉपडाउन, डेट पिकर और चेकबॉक्स वेरिफिकेशन जैसे फीचर्स दिए गए हैं। अब टैक्स, सेस और सरचार्ज एक ही कॉलम में रिपोर्ट होता है, जिससे पूरा प्रोसेस और सरल हो गया है। इन बदलावों से समय की बचत होती है, मैनुअल गलतियां और मिसमैच कम होते हैं और रिटर्न प्रोसेसिंग भी तेज होती है, जिससे डिडक्टर्स और टैक्सपेयर्स दोनों को फायदा मिलता है।

कुल मिलाकर फॉर्म 138 और 140 टैक्स कंप्लायंस को आसान, टेक आधारित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। विभाग का कहना है कि इस बदलाव से समय बचेगा, मैन्युअल गलतियां कम होंगी, डेटा में गड़बड़ी (मिसमैच) नहीं होगी और टैक्स रिफंड या प्रोसेसिंग भी जल्दी हो सकेगी।

नए फॉर्म 138 की खासियत



  • इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक नए Form 138 और 140 को पहले से ज्यादा आसान, टेक्नोलॉजी से लैस और भरोसेमंद बनाया गया है, ताकि लोग बिना झंझट के और समय पर अपना TDS रिटर्न फाइल कर सकें।
  • इन नए फॉर्म्स में कई स्मार्ट फीचर्स भी दिए गए हैं, जैसे जानकारी अपने आप भर जाना (ऑटो प्री-फिल), तुरंत गलती पकड़ने वाला सिस्टम (रियल-टाइम वैलिडेशन), आसान सिलेक्शन के लिए ड्रॉप-डाउन मेन्यू, डेट चुनने के लिए कैलेंडर और चेकबॉक्स वेरिफिकेशन।
  • Form 138 खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो सैलरी देते हैं, यानी कंपनियां या एंप्लायर (employers)। इसका इस्तेमाल यह बताने के लिए किया जाता है कि उन्होंने अपने कर्मचारियों की सैलरी से कितना TDS (टैक्स) काटा है।
  • इसके अलावा, कुछ तय बैंक भी इस फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वे यह रिपोर्ट कर सकें कि उन्होंने सीनियर सिटीजन्स को दी गई आय पर कितना TDS काटा है।

किसके लिए है फॉर्म 138



Form 138 भरना दो तरह के लोगों और संस्थाओं के लिए जरूरी है। पहला, कोई भी एप्लायर (employer), चाहे वह कंपनी हो, फर्म हो, सरकारी विभाग हो या कोई व्यक्ति, जो अपने कर्मचारियों की सैलरी से टैक्स (TDS) काटता है। दूसरा, कुछ तय बैंक भी यह फॉर्म भरते हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली पेंशन या ब्याज की आय पर टैक्स काटते हैं।

बात करें 26Q की जगह लेने वाले Form 140 की तो इसका इस्तेमाल उन मामलों में होता है, जहां सैलरी के अलावा किसी और पेमेंट पर जैसे कमीशन, ब्रोकरेज, प्रोफेशनल फीस या किराया आदि टैक्स (TDS) काटा जाता है।

TCS से जुड़ी जरूरी बातें



  • यह फॉर्म हर तीन महीने में भरा जाता है, ताकि सरकार को बताया जा सके कि इन पेमेंट्स पर कितना टैक्स काटा गया है।
  • यह फॉर्म हर उस संस्था या व्यक्ति को भरना होता है, चाहे वह कंपनी हो, फर्म हो, पार्टनरशिप हो, सरकारी विभाग हो या कोई व्यक्ति, जो किसी भारतीय निवासी को सैलरी के अलावा पेमेंट्स करता है और उस पर TDS काटता है।
  • सरकार ने TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) के नियमों में बदलाव करते हुए इसकी दरें कम कर दी हैं, ताकि लोगों पर शुरुआत में पड़ने वाला टैक्स का बोझ हल्का हो सके।
  • अब विदेश घूमने के पैकेज पर TCS सिर्फ 2% लगेगा, जबकि पहले यह 10 लाख रुपये तक 5% और उससे ज्यादा रकम पर 20% तक था।
  • इसी तरह, विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर भी TCS घटाकर 5% से 2% कर दिया गया है।

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