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Tier-I vs Tier-II : NPS में दो तरह के खाते क्यों होते हैं? निवेश से पहले समझ आपके लिए कौन-सा है बेहतर

Tier-I vs Tier-II : NPS में दो तरह के खाते क्यों होते हैं? निवेश से पहले समझ आपके लिए कौन-सा है बेहतर

Tier-I vs Tier-II : रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियली सुरक्षित रहने के लिए आज बड़ी संख्या में लोग नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश कर रहे हैं। यह सरकार द्वारा जारी की गई रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) रेगुलेट करता है।

NPS की खास बात यह है कि इसमें निवेशकों को दो तरह के अकाउंट मिलते हैं - Tier-I और Tier-II।

अब कई लोग अकाउंट खोलते समय इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि दोनों खातों में क्या फर्क है और उनके लिए कौन-सा ज्यादा फायदेमंद रहेगा। ऐसे में निवेश से पहले दोनों खातों के नियम और फायदे समझना जरूरी हो जाता है।

NPS एक रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें निवेश की गई राशि अलग-अलग फंड में लगाई जाती है। इसका मकसद रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना और नियमित पेंशन की व्यवस्था करना है। यह स्कीम नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भी है।

क्या होता है Tier-I अकाउंट?

Tier-I अकाउंट NPS का मुख्य रिटायरमेंट अकाउंट होता है। इसमें निवेशक या नियोक्ता द्वारा जमा किया गया पैसा लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाता है। यह अकाउंट रिटायरमेंट सेविंग के लिए बनाया गया है, इसलिए इसमें निकासी के नियम तय हैं।


Tier-I अकाउंट खोलने के लिए कम से कम 500 रुपए जमा करना जरूरी होता है। वहीं हर साल न्यूनतम 1,000 रुपए का योगदान करना होता है। इस अकाउंट में टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे लंबी अवधि की रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए चुनते हैं।

Tier-II अकाउंट कैसे अलग है?

Tier-II अकाउंट एक वैकल्पिक यानी ऑप्शनल अकाउंट होता है। इसे तभी खोला जा सकता है, जब आपके पास एक्टिव Tier-I अकाउंट हो।

इस अकाउंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पैसे निकालने पर कोई रोक नहीं होती। जरूरत पड़ने पर निवेशक कभी भी पैसा निकाल सकता है। इसलिए इसे एक तरह का फ्लेक्सिबल सेविंग अकाउंट भी माना जाता है। Tier-II अकाउंट खोलने के लिए कम से कम 250 रुपए जमा करना होता है। हालांकि इसमें सालाना न्यूनतम निवेश की कोई शर्त नहीं है।

दोनों खातों में क्या है बड़ा फर्क?

Tier-I अकाउंट का मकसद रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि का फंड तैयार करना है। इसमें टैक्स लाभ और अनुशासित निवेश का फायदा मिलता है, लेकिन निकासी पर नियम लागू होते हैं।

वहीं Tier-II अकाउंट ज्यादा लचीला है। इसमें पैसा कभी भी निकाला जा सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से छोटी अवधि की जरूरतों के लिए माना जाता है।

आपके लिए कौन-सा अकाउंट बेहतर?
अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाना और टैक्स बचाना है, तो Tier-I अकाउंट ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। वहीं अगर आप NPS के भीतर ऐसा अकाउंट चाहते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसा निकाला जा सके, तो Tier-II अकाउंट सही होगा

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