West Asia crisis: वेस्ट एशिया में जारी तनाव अब सीधे भारतीय किचन तक असर दिखाने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई पर मंडराते खतरे के बीच सरकार ने इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों के उत्पादन को तेज करने पर मंथन शुरू कर दिया है।
शुक्रवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बढ़ती मांग को कैसे जल्दी और प्रभावी तरीके से पूरा किया जाए।
LPG चिंता ने बदली कंज्यूमर चॉइस
असल में, Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कुकिंग गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के व्यवहार पर दिख रहा है। लोग तेजी से इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केतली जैसे विकल्पों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। इंडस्ट्री प्लेयर्स के मुताबिक, इन प्रोडक्ट्स की बिक्री हॉट केक की तरह बढ़ रही है।
यह बदलाव केवल अस्थायी नहीं लगता, बल्कि एक बड़े ट्रेंड की शुरुआत हो सकता है, जहां उपभोक्ता एलपीजी पर निर्भरता कम करके बिजली आधारित कुकिंग सॉल्यूशंस अपनाने लगें।
सप्लाई और प्रोडक्शन दोनों पर फोकस
सरकार का फोकस सिर्फ मांग को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई साइड को भी मजबूत करना है। बैठक में इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा, सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स के आयात पर कस्टम ड्यूटी में तीन महीने की छूट दी है। इससे फार्मा, टेक्सटाइल, केमिकल और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर्स को राहत मिलेगी। यह फैसला सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है, खासकर तब जब ग्लोबल ट्रेड रूट्स पर दबाव बढ़ा हुआ है।
ग्लोबल फैक्टर्स का घरेलू असर
28 फरवरी को United States और Israel द्वारा Iran पर सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और बिगड़े। इसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया।
इसका असर यह हुआ कि कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक उछाल आ गया। भारत जैसे देश, जो तेल और गैस के बड़े आयातक हैं, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। साथ ही, उर्वरक और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ने का खतरा है।
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