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Bihar News: शिक्षा विभाग में फिर बजा 1ST Bihar/Jharkhand का डंका, खबर के बाद DEO को जारी करना पड़ा सख्त आदेश, खजाने पर थी माफियाओं की नजर...

Bihar News: शिक्षा विभाग में फिर बजा 1ST Bihar/Jharkhand का डंका, खबर के बाद DEO को जारी करना पड़ा सख्त आदेश, खजाने पर थी माफियाओं की नजर...

Bihar News: पूर्वी चंपारण के सरकारी विद्यालयों में खेल सामाग्री से खिलवाड़ करने के खुलासे के बाद से हड़कंप मचा है. 1ST Bihar/Jharkhand ने 17-18 मार्च को इस बड़े खेल का खुलासा किया था.

इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चंपारण को पत्र जारी करना पड़ा है. इस तरह से बिना सामाग्री सप्लाई किए ही चहेते वेंडरों द्वारा सरकारी राशि की निकासी पर ब्रेक लग गया है.

खबर का बड़ा असर, जारी करना पड़ा आदेश

जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चंपारण ने 18 मार्च को जो पत्र लिखा है उसमें सभी प्रधानाध्यापक को हिदायत दी गई है. कहा गया है कि सभी प्रधान शिक्षकों द्वारा विद्यालय में खेल सामग्री विभागीय नियमों के तहत करें. उन्होंने 1ST Bihar/Jharkhand की खबर के हवाले से पत्र जारी किया है.पत्र में कहा गया है कि सभी विद्यालयों में खेल सामग्री उपलब्ध कराने को लेकर समग्र शिक्षा के तहत राशि उपलब्ध कराई गई है. 28 फरवरी 2026 को इस संबंध में आवश्यक नितिशा निर्देश निर्गत किए गए हैं. जिसका पालन करना अनिवार्य है. उल्लेखनीय है कि डिजिटल मीडिया के माध्यम से जिला कार्यालय को ऐसी सूचना मिली है कि विद्यालयों में बिना खेल सामग्री क्रय किए ही, विद्यालय द्वारा पीपीए जेनरेट कर संबंधित एजेंसी को राशि भुगतान कराया जा रहा है. यह विभागीय आदेश की अवहेलना है. ऐसे में निर्देश दिया जाता है कि खेल सामग्री प्राप्ति के बाद ही संबंधित एजेंसी को पीपीए के माध्यम से राशि का भुगतान करें. ऐसा नहीं करने वाले विद्यालयों चिन्हित कर क्रय समिति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.

पूर्वी चंपारण में हो रहा था खेल...

बिहार सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में खेल सामाग्री के लिए 5 हजार रू, मध्य विद्यालयों में 10 हजार और हाईस्कूलों में 25 हजार रू की राशि भेजी है. इस राशि से बच्चों का खेल सामाग्री खरीदना है. मार्च महीने में ही खरीदारी कर लेनी है. अब इस पैसे पर माफियाओं की नजर लग गई .सरकार ने तय़ किया है कि संबंधित स्कूल के हेडमास्टर, एक वरीय शिक्षक और खेल शिक्षक तय करेंगे कि कौन-कौन सामान की खरीद करनी है, किससे खरीदारी करनी है, वो स्वतंत्र हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारी यह तय नहीं करेंगे कि आपको किस सप्लायर से खरीद करनी है. लेकिन पूर्वी चंपारण में प्रधान शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा था. जिले के ढाका प्रखंड में इस खेल का खुलासा हुआ. कई हेडमास्टरों ने अधिकारी और सप्लायर की मिलीभगत से जबरन राशि निकासी के लिए दबाव बनवाया जा रहा है. जबकि खेल सामाग्री की आपूर्ति भी नहीं की गई है.

पूर्वी चंपारण के ढाका में पैसे की निकासी की तैयारी

पूर्वी चंपारण के ढाका प्रखंड में सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए आई सरकारी राशि के बंदरबांट की तैयारी शुरू थी. इसमें ठेकेदार से लेकर अधिकारी तक की मिलीभगत सामने आ रही थी. इसके बाद 1ST Bihar/Jharkhand ने खबर ब्रेक किया. जिसमें बताया गया कि इस राशि पर माफियाओं की नजर लग गई .चालू वित्तीय वर्ष में पैसे की निकासी किसी कीमत पर हो जाए, इसकी प्लानिंग चल रही है. पूर्वी चंपारण के ढाका प्रखंड में कई शिक्षकों ने इसकी जानकारी दी कि सामान आया नहीं और पैसे की निकासी को लेकर प्रेशर है. बिना सामान क्रय किए और स्कूल में भेजे ही पीपीए काटा जा रहा है. प्रखंड के अधिकारी-अकाउंटेंट-संबंधित ठेकेदार और अन्य मिलकर राशि निकासी की तैयारी में जुटे हैं. यानि खेल सामाग्री आते रहेगा लेकिन माल(पैसा) मार्च महीने में ही निकासी हो जायेगी.

क्या कहते हैं डीपीओ समग्र शिक्षा....

जब हमने ढाका प्रखंड के बीईओ से पूछा तब उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी हमारे पास नहीं है. अगर ऐसी बात होगी तब हम इसकी जांच करेंगे. पूर्वी चंपारण (सर्व शिक्षा अभियान) के डीपीओ प्रह्लाद गुप्ता ने इस मामले पर कहा कि हमको पता करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि ''देखिए हम आपको बता रहे हैं, वेंडरों का उल्लू सीधा नहीं होता है तब इधऱ-उधर करते हैं. इसमें जो गाइडलाइन है, जो हेमास्टर हैं,वरीय शिक्षक और खेल शिक्षक है, वही कमेटी तय करेगी. कहीं से भी किसी से भी खरीदें, हमलोग किसी सप्लायर को इंपैनल नहीं किए हैं.' जो जहां से चाहे खेल सामाग्री खरीद सकता है,किसी का किसी पर दबाव नहीं है'. खबर के तुरंत बाद ही 18 मार्च को जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चंपारण ने आदेश जारी कर सभी प्रधानाध्यापकों को हड़काया है.

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