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राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया ड्यूटी पर निःशक्त हुए कर्मचारी को पूर्ण सैलरी देने के आदेश

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस एस पी शर्मा की एकलपीठ ने सर्विस मामले में रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई कर्मचारी सर्विस के दौरान निशक्तजन होने के कारण सर्विस में कार्य नहीं कर सकता है तो नियोक्ता द्वारा ऐसे कर्मचारी को घर बैठे संपूर्ण सैलरी का भुगतान नियमित रूप से उसके सेवानिवृत होने तक करना होगा.

संपूर्ण रिटायरमेंट बेनिफिट का भुगतान करना होगा:
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ये भी व्यवस्था दी है कि सेवानिवृति के पश्चात भी कर्मचारी को संपूर्ण रिटायरमेंट बेनिफिट का भुगतान करना होगा. ये आदेश जस्टिस एस पी शर्मा ने सिंचाई विभाग के कर्मचारी जयपुर निवासी उम्मेदसिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है. कर्मचारी उम्मेदसिंह राज्य के सिंचाई विभाग में 1979 में वाहनचालक के पद पर नियुक्त हुआ. दो वर्ष के परीविक्षा काल के पश्चात उम्मेदसिंह को सेमी परमानेंट कर दिया गया था. डयूटी के दौरान मई 2015 में उम्मेदसिंह को पैरालिसिस का अटैक आने से उम्मेदसिंह का शरीर 60 प्रतिशत निष्क्रिय हो गया. पैरालाईज हो जाने के चलते उम्मेदसिंह अपनी डयूटी पर सेवा देने में असमर्थ हो गया जिसके बाद मार्च 2017 में सिचाई विभाग ने उम्मेदसिंह को मासिक सैलरी का भुगतान रोक दिया.

भुगतान बैंक एकाउण्ट में बिना देरी के जमा हो:
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कर्मचारी को किसी भी कार्य के लिए अनफिट होने के चलते स्वैच्छिक सेवानिवृति दिये जाने की बात कही. जिसे हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया. साथ ही हाईकोर्ट नें सरकार को आदेश दिये है कि कर्मचारी का भुगतान हर माह उसके बैंक एकाउण्ट में बिना देरी के जमा किया जाये.

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