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VIDEO: राजस्थान के लघु और सीमांत किसानों के लिए बड़ी पहल, किसानों को किराए पर मिल सकेंगे कृषि उपकरण, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: राजस्थान के लघु और सीमांत किसानों के लिए बड़ी पहल, किसानों को किराए पर मिल सकेंगे कृषि उपकरण, देखिए ये खास रिपोर्ट

First India News 1 week ago

यपुर: प्रदेश का लघु और सीमांत किसान भी अपने खेत में बेहतर उत्पादन कर सकेगा. बड़ी बात है कि जो किसान कृषि यंत्र खरीद नहीं सकते, वे अब किराए पर लेकर खेती कर सकेंगे और अच्छी खेती कर मुनाफा भी कमा सकेंगे.

कहा जाए तो लघु एवं सीमांत किसानों को कृषि से जुड़े हुए उपकरण कम दरों पर किराए पर मिल सकेंगे. इसके लिए कृषि विभाग ने टैफे जेफार्म कम्पनी के साथ एमओयू साइन किया है. क्या शामिल किया गया एमओयू में.

राजस्थान के छोटे एवं सीमांत किसानों को कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी. लाखों किसानों को लाभ देने के लिए कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की पहल पर यह एमओयू साइन किया...कृषि विभाग की इस पहल से ट्रैक्टर एवं उपकरण किराया इकोसिस्टम मजबूत होगा और राज्य में सतत कृषि विकास को गति मिलेगी.

समझौते की मुख्य विशेषताएं ---बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क के ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध होंगे ---जेफ़ार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म को राज किसान साथी पोर्टल के साथ एकीकृत होगा ---किसानों को डिजिटल माध्यम से निर्बाध सेवाएं मिल सकेंगी ---फसल चक्र के पूरे चरण-भूमि तैयारी, बुआई, कटाई एवं पोस्ट-हार्वेस्टिंग में यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा --- किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटर्स, ट्रैक्टर मालिकों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा ---कृषि यंत्र किराया इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा ----किसान जागरूकता कार्यक्रम, प्रदर्शन, किसान गोष्ठियां एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे ---किसानों, FPOs, ग्रामीण युवाओं, छात्रों, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और एग्री-स्टार्टअप्स के क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण एवं ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे

कृषि विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल की मौजूदगी में एमओयू साइन किया गया. इस एमओयू के माध्यम से किसान जेफार्म सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण आसानी से किराए पर ले सकेंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादकता बढ़ेगी. कृषि प्रमुख सचिव मंजू राजपाल ने कहा कि विकसित राजस्थान 2047 के विजन के तहत बजट घोषणाओं में कस्टम हायरिंग सेंटर्स पर जोर दिया जा रहा है. वर्ष 2015 से 2024 तक 1850 कस्टम हायरिंग सेंटर्स शुरू हुए. इसके सपोर्ट सिस्टम के रूप में यह एमओयू कार्य करेगा. मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 400 कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू हो चुके हैं, जबकि 850 कस्टम हायरिंग सेंटर्स को शुरू किया जा रहा है. इस मौके पर उद्यानिकी आयुक्त श्वेता चौहान, टैफे के डायरेक्टर टीआर केसवन भी मौजूद रहे.

देखने वाली बात यह रहेगी कि एमओयू से सीमांत और लघु किसानों को एमओयू का कितना लाभ हो पाता है. इन दिनों खरीफ की बुवाई चल रही है और खेती में कृषि उपकरणों की आवश्यकता को देखते हुए कितनी आसानी से उपकरण प्राप्त होते हैं.

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