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VIDEO: सीएम गहलोत की बजट घोषणा पर काम शुरू, पेट्रोकेमिकल परियोजना अक्टूबर 2022 तक की जाएगी पूरी

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट भाषण में कई बार रिफाइनरी का जिक्र किया था. दरअसल राज्य सरकार को रिफाइनरी से काफी उम्मीदें हैं. न केवल रिफाइनरी शुरू होने के बाद सरकार के खजाने में मोटी राशि आएगी, वरन रिफाइनरी क्षेत्र के आसपास पेट्रोकेमिकल कॉन्प्लेक्स बनने से प्रदेश की फिजा भी बदल जाएगी. अब पेट्रोलियम और खान विभाग ने सीएम की बजट घोषणा पर काम शुरू कर दिया है. एम सैंड पॉलिसी और खनिज नीति में संशोधन की प्रक्रिया पर भी कार्य शुरू हो गया है. एक रिपोर्ट:

परियोजना अक्टूबर 2022 तक पूरी:
सीएम अशोक गहलोत ने बजट भाषण में पेट्रोलियम और खनिज को लेकर काफी अहम घोषणाएं की थी. गहलोत ने कहा था कि पचपदरा रिफाइनरी कम पेट्रोकेमिकल कॉन्प्लेक्स परियोजना अक्टूबर 2022 तक पूरी की जाएगी. रिफाइनरी योजना पर आधारित प्लास्टिक, रबड़, डिटर्जेंट, फाइबर, लुब्रिकेंट, डाई, ड्रग्स, पेस्टिसाइड्स एंड कॉस्मेटिक जैसे उद्योगों को राज्य में स्थापित करने के लिए रिको द्वारा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जाने की घोषणा की थी. अब संबंधित विभागों ने सीएम की बजट घोषणा पर कार्य योजना तैयार कर ली है और समयबद्ध तरीके से इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की दिशा में काम शुरू कर दिया है. रिफाइनरी से बाड़मेर, जोधपुर सहित पश्चिम राजस्थान के हजारों लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.

सीएमओ के स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच:
गहलोत ने खनन पर बजट में कहा था कि अदालत के आदेशों से प्रदेश में बजरी खनन पर प्रतिबंध है. हालात ऐसे हो गए हैं कि प्रदेश में माफिया सक्रिय है और अवैध खनन बढ़ गया है. पिछली सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. बल्कि भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में ईमानदार लोगों ने भी हाथ धोए और वह भी भ्रष्ट श्रेणी में आ गए. यह गंगा किसने बहाई यह जांच का विषय है. सीएमओ के स्तर पर खनन क्षेत्र में हुए भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है. वर्ष 2013 से 2018 तक खनन आवंटन और अवैध खनन में लिफ्ट अफसरों की सूची भी तैयार की जा रही है. बाजार में बजरी उपलब्ध रहे इसके लिए तात्कालिक समाधान ढूंढने के साथ साथ दीर्घकालीन विकल्प के रूप में एम सैंड को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान एम सैंड नीति 2019 लगभग तैयार है.

अवैध खनन रोकने के लिए कड़े प्रावधान:
गहलोत ने कहा था कि जन घोषणा पत्र में अंतिम संकल्प के मुताबिक राजस्थान खनिज नीति 2015 की समीक्षा कर माइनर मिनरल के नियमों का सरलीकरण किया जाएगा. अब निदेशालय स्तर पर खनन व्यवसायियों और लीज धारकों से मिले सुझाव के बाद खनिज नीति में संशोधन का दस्तावेज तैयार हो रहा है, जिसे मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा. इसमें अवैध खनन रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं. उधर पेट्रोलियम क्षेत्र की बात करें तो राज्य के बाड़मेर में तेल का उत्पादन होने के बाद देश में बॉम्बेहाई के बाद राजस्थान दूसरा अग्रणी तेल उत्पादक क्षेत्र बन गया है. बाड़मेर क्षेत्र में 7 मिलियन से अधिक खनिज तेल का वार्षिक उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 24 फ़ीसदी है. केंद्र सरकार ने राज्य को 10 ब्लॉक आवंटित किए हैं जिससे तेल उत्पादन होने पर राज्य को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी.

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट

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