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​​​जब एक हिंदू लड़की ने बचाई मुस्लिम ट्रक ड्राइवर की जान, रक्षाबंधन पर भाई बनकर कुछ ऐसे लौटाया एहसान. जानकर आँखे रह जाएगी नम​​​​​​​

​​​जब एक हिंदू लड़की ने बचाई मुस्लिम ट्रक ड्राइवर की जान, रक्षाबंधन पर भाई बनकर कुछ ऐसे लौटाया एहसान. जानकर आँखे रह जाएगी नम​​​​​​​

कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर बसे एक छोटे से गांव में एक ऐसी घटना घटी थी, जिसने इंसानियत, भाईचारे और रक्षाबंधन के असली अर्थ को लोगों के सामने जीवंत कर दिया था। यह घटना उस समय पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई थी, क्योंकि इसमें एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम ट्रक चालक के बीच बना भाई-बहन का रिश्ता लोगों के दिलों को छू गया था।

कैसे शुरू हुई थी यह कहानी

बताया जाता है कि गांव के बाहर एक मोड़ पर एक भारी ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया था। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग डर के कारण ट्रक के पास जाने से हिचक रहे थे। ट्रक से धुआं निकल रहा था और ड्राइवर अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था।

उसी समय वहां से गुजर रही 18 वर्षीय लड़की, जिसे यहां सुरक्षा (बदला हुआ नाम) कहा गया है, ने बिना डरे आगे बढ़कर ड्राइवर को बचाने की कोशिश की थी। उसने आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया और काफी मशक्कत के बाद घायल ड्राइवर को ट्रक से बाहर निकाला गया था।

घायल ड्राइवर की पहचान

बाद में पता चला था कि वह घायल युवक मोहम्मद राशिद था, जो पंजाब से झारखंड की ओर माल लेकर जा रहा था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। दुर्घटना में उसे गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन समय रहते अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण उसकी जान बच गई थी।

रक्षाबंधन के दिन हुई थी खास मुलाकात

कुछ हफ्तों बाद जब रक्षाबंधन का पर्व आया, तब इस घटना ने एक नया मोड़ लिया था। उस दिन अचानक मोहम्मद राशिद सुरक्षा के घर पहुंचा था। गांव के लोग उस समय हैरान रह गए थे जब राशिद ने सुरक्षा से राखी बंधवाई थी और उसे अपनी बहन मान लिया था।

राखी बंधवाने के बाद उसने सुरक्षा को तोहफे में एक नई स्कूटी भी दी थी। यह देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई थीं, क्योंकि यह सिर्फ एक उपहार नहीं बल्कि आभार और सम्मान का प्रतीक था।

राशिद ने क्या कहा था

उस समय राशिद ने कहा था कि अगर उस दिन सुरक्षा ने हिम्मत न दिखाई होती तो शायद वह आज जिंदा न होता। उसने यह भी कहा था कि अब वह अपनी इस बहन की पढ़ाई में हर संभव मदद करेगा।

सुरक्षा की जिंदगी में आया बदलाव

सुरक्षा ने उस समय हाल ही में 12वीं की परीक्षा पास की थी और कॉलेज जाने के लिए उसे रोज कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। राशिद द्वारा दी गई स्कूटी उसके लिए किसी सपने के सच होने जैसी थी। इसके बाद वह आसानी से कॉलेज जाने लगी थी और गांव की अन्य लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन गई थी।

गांव वालों की प्रतिक्रिया

उस समय गांव के लोगों ने भी इस घटना को इंसानियत की मिसाल बताया था। गांव के प्रधान रामकृष्ण यादव ने कहा था कि ऐसे दौर में जब लोग धर्म और जाति के नाम पर बंटते नजर आते हैं, यह घटना समाज को एक नई सीख देती है।

इंसानियत की मिसाल बनी यह घटना

यह घटना केवल एक राखी और एक स्कूटी की कहानी नहीं थी। यह उस रिश्ते की कहानी थी जो खून से नहीं बल्कि इंसानियत और भरोसे से बना था। इस घटना ने लोगों को यह याद दिलाया था कि इंसानियत किसी भी धर्म या जाति से बड़ी होती है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Gazab Viral