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अब एक ही पोर्टल से अपडेट होंगे Aadhaar, PAN और Voter ID; सरकार के 'वन-स्टॉप पोर्टल' से खत्म होगी अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी

अब एक ही पोर्टल से अपडेट होंगे Aadhaar, PAN और Voter ID; सरकार के 'वन-स्टॉप पोर्टल' से खत्म होगी अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी

Girls Globe 2 weeks ago

भारत में रहने वाले नागरिकों के लिए अपने प्रमुख पहचान पत्रों-जैसे आधार, पैन (PAN) कार्ड, वोटर आईडी (EPIC) और ड्राइविंग लाइसेंस (DL)-में नाम, पता या मोबाइल नंबर अपडेट कराना अक्सर एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया साबित होती है।

वर्तमान में यदि कोई व्यक्ति अपना मकान बदलता है या शहर शिफ्ट करता है, तो उसे यूआईडीएआई (UIDAI), आयकर विभाग (Income Tax Department), चुनाव आयोग (ECI) और परिवहन विभाग (Sarathi Parivahan) के अलग-अलग पोर्टलों पर जाकर बार-बार फॉर्म भरने और दस्तावेज अपलोड करने पड़ते हैं। इस जटिलता को खत्म करने और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक ऐसे एकीकृत ‘वन-स्टॉप नेशनल पोर्टल’ और एपीआई-आधारित डिजिटल फ्रेमवर्क पर तेजी से काम कर रही है, जिसके जरिए एक ही जगह आवेदन करके सभी लिंक्ड दस्तावेजों में जानकारी स्वतः अपडेट हो सकेगी।

यह एकीकृत व्यवस्था ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘इंडिया स्टैक’ के सुरक्षित आर्किटेक्चर पर आधारित है।

  • वन-टाइम रिक्वेस्ट मॉडल: जब कोई नागरिक इस केंद्रीय पोर्टल या उमंग (UMANG) व डिजिलॉकर (DigiLocker) समर्थित प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करेगा और प्रमाणीकरण (OTP/बायोमेट्रिक) के जरिए अपने पते या डेमोग्राफिक डेटा में बदलाव का अनुरोध दर्ज करेगा, तो सिस्टम इस अनुरोध को रजिस्टर्ड आइडेंटिफायर्स से प्रोसेस करेगा।

  • इंटरकनेक्टेड डाटाबेस (Interoperability): आधार प्रमाणीकरण और सहायक पते के प्रमाण का सत्यापन होते ही पोर्टल बैकएंड एपीआई (API) के जरिए आयकर विभाग (पैन डेटाबेस), निर्वाचन आयोग (वोटर लिस्ट) और सड़क परिवहन मंत्रालय (ड्राइविंग लाइसेंस डेटाबेस) को अधिकृत नोटिफिकेशन और अपडेटेड डेटा पुश कर देगा।

  • सहमति-आधारित व्यवस्था (Consent-Based Architecture): नागरिक से डिजिटल सहमति (Consent) ली जाएगी कि वह किन-किन दस्तावेजों में यह नया पता सिंक (Sync) करना चाहता है, जिससे डेटा प्राइवेसी और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके।

इस एकीकृत व्यवस्था के लागू होने से आम जनता को कई बड़े फायदे मिलेंगे:

  • समय और पैसे की बचत: हर विभाग के अलग-अलग पोर्टल पर अलग-अलग शुल्क चुकाने, बार-बार फॉर्म भरने और हफ्तों इंतजार करने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

  • डॉक्यूमेंट मिसमैच की समस्या का अंत: कई बार ऐसा होता है कि आधार में नया पता होता है लेकिन पैन या वोटर आईडी में पुराना पता दर्ज रहता है। इस वजह से बैंक लोन, पासपोर्ट वेरिफिकेशन या वित्तीय केवाईसी में अड़चनें आती हैं। सिंगल पोर्टल से सभी जगह डेटा एक समान रहेगा।

  • बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए आसान ई-केवाईसी: बैंक खाते, म्यूचुअल फंड्स, बीमा पॉलिसियों और डीमैट अकाउंट्स में भी एक साथ केवाईसी रिफ्रेश करना बेहद सुगम हो जाएगा।

सरकार द्वारा संचालित आईटी एजेंसियां और संबंधित मंत्रालय वर्तमान में डेटाबेस इंटीग्रेशन और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की टेस्टिंग कर रहे हैं।

  • वर्तमान में उपलब्ध सुविधा: मौजूदा व्यवस्था में आयकर विभाग के पोर्टल (Protean / NSDL) पर आधार आधारित ई-केवाईसी के जरिए पैन कार्ड में पता अपडेट करने की डिजिटल सुविधा उपलब्ध है। इसी तरह ईसीआई के ‘वोटर्स सर्विसेज पोर्टल’ (voters.eci.gov.in) और परिवहन पोर्टल पर अलग-अलग फॉर्म 8 व ऑनलाइन सर्विसेज के जरिए बदलाव किए जा रहे हैं।

  • पूर्ण रोलआउट की समयसीमा: सभी प्रमुख सरकारी डेटाबेसों को एक साथ लिंक करने वाले इस ऑटोमेटेड सिंगल-विंडो सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसका बीटा ट्रायल पूरा होते ही इसे देश के सभी नागरिकों के लिए आधिकारिक रूप से लाइव किया जाएगा।

  • मोबाइल नंबर एक्टिव रखें: सभी डिजिटल अपडेट्स और प्रमाणीकरण ओटीपी (OTP) के जरिए होते हैं, इसलिए आपका एक्टिव मोबाइल नंबर आपके पहचान पत्रों से लिंक होना अनिवार्य है।

  • वैध पता प्रमाण (Address Proof): बिजली बिल, बैंक पासबुक, रेंट एग्रीमेंट या डोमिसाइल सर्टिफिकेट जैसे वैध दस्तावेजों की स्पष्ट डिजिटल कॉपी अपने पास रखें।

  • फर्जी वेबसाइटों और फ्रॉड लिंक से बचें: किसी भी प्रकार का अपडेट केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल्स (.gov.in या .nic.in) या आधिकारिक मोबाइल ऐप्स के माध्यम से ही करें।

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