उत्तराखंड जिसे दुनिया में खूबसूरत वेडिंग डेस्टिनेशन के नाम से जाना जाता है। वहीं अब स्थानीय युवाओं के लिए शादी करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पहाड़ों में अब घर बसाने का सपना आसान नहीं रहा।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह समस्या अब सिर्फ दूर-दराज के गांवों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजधानी देहरादून में भी हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
पिथौरागढ़ से देहरादून तक गहराता संकट
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून में विवाह योग्य लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या इतनी कम है कि हर तीन लड़कों में से दो को जीवनसाथी मिलना मुश्किल हो रहा है। यह स्थिति अब एक गंभीर सामाजिक चिंता का रूप ले चुकी है। राज्य के सीमांत जिलों पिथौरागढ़ और चम्पावत में पहले से ही लड़कियों की कमी को लेकर खबरें सामने आती रही हैं। वहां कई परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए नेपाल तक का रुख कर रहे हैं। लेकिन अब जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट ने राजधानी देहरादून की जो तस्वीर पेश की है, उसने सभी को चौंका दिया है।
25 से 29 साल के 35 हजार से ज्यादा युवक तलाश रहे शादी के लिए लड़की
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देहरादून जिले में शादी में आ रही अड़चनों की सबसे बड़ी वजह लिंगानुपात का असंतुलन है। रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार 25 से 29 उम्र के 35 हजार से ज्यादा युवक शादी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि लड़कियों की संख्या केवल 11 हजार 836 है। वहीं 30 से 34 साल के यहां 10,103 युवक हैं, जबकि लड़कियां मात्र 3,031 हैं।
ये भी पढ़ें: हरियाणा का डाकिया बना उत्तराखंड का दामाद, युवती को भगा कर रचाई मंदिर में शादी
35 की उम्र पार कर चुके 7 हजार से अधिक युवा
इसके अलावा 35 साल से अधिक करीब 7 हजार 25 युवक 35 की उम्र पार कर चुके हैं, जिनमें से 3 हजार 281 तो 40 साल की दहलीज भी लांघ चुके हैं, लेकिन अब भी अविवाहित हैं। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि उत्तराखंड में शादी को लेकर सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
ये भी पढ़ें: गणेश गोदियाल के 'ब्वारी लेकर आएंगे' बयान पर भड़की दीप्ति रावत, बोली महिलाओं का सम्मान करो

