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हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया; सरकार को नोटिस जारी करके पूछा- रातों रात कैसे किया अंतिम संस्कार, जरूरत पड़ी तो अन्य एजेंसी से कराएंगे जांच

यूपी के हाथरस में एक दलित महिला के साथ हुए गैंगरेप के मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी सरकार से जवाब तलब किया है।

  • यूपी के हाथरस में 14 सितम्बर को हुई थी गैंगरेप की वारदात
  • गैंगरेप में शामिल चारों आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित युवती के साथ हुए दुष्कर्म के मामले को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। इस बीच इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार और हाथरस के अधिकारियों को नोटिस जारी करके पूछा है कि आखिर रातों रात पीड़ित का अंतिम संस्कार क्यों किया गया। सरकार को 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में जवाब देना है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की 29 सितम्बर को मौत के बाद हाथरस के जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया कथित बर्ताव बहुत दर्दनाक है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित और उसके परिवार के साथ किया गया बर्ताव संविधान के अनुच्छेद 25 का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है, क्योंकि मृतक का अंतिम संस्कार उसके धर्म व रीति के अनुसार होना चाहिए। परिवार को इसका हक है।

जरूरत पड़ी तो अन्य एजेंसी से भी कराई जा सकती है जांच

कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने पर कहा कि यदि वह अगली सुनवाई पर विवेचना में प्रगति से संतुष्ट नहीं हुआ तो वह मामले की अन्य एजेंसी से जांच करा सकता है। कोर्ट ने पीड़ित के परिजन को भी अगली तारीख पर बुलाया है और हाथरस प्रशासन को इसके लिए उनकी हर प्रकार से सहायता करने को कहा है।

कोर्ट ने चेताया कि पीड़ित के परिवार को किसी प्रकार की धमकी न दी जाए। कोर्ट ने विवेचना की प्रगति आख्या भी तलब किया है। दरअसल, कोर्ट ने मीडिया में खबरों को पढ़कर प्रथम दृश्टया पाया कि पीड़ित के परिवार के साथ किया गया प्रशासन व पुलिस का व्यवहार मर्यादा की सारी सीमाएं लांघने वाला है।

अदालत ने मीडिया से भी मांगे सबूत

कोर्ट ने विभिन्न अखबारों व न्यूज चैनलों से कहा है कि वे घटना के बावत उनके पास जो भी मैटीरियल है उसे पेन ड्राइव या सीडी में उसे दाखिल करें।अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि गरीबों व दबे कुचले लोगो के मूलभूत संविधानिक अधिकारों की रक्षा करना उसका कार्य है और प्रशासनिक या राजनीतिक कारणों से उसका उल्लंघन नहीं होने दे सकता है।

कोर्ट ने कहा कि वह देखेगा कि कहीं पीड़ित की गरीबी या सामाजिक स्तर के कारण तो उसके साथ सरकारी मशीनरी ने यह अत्याचार तो नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में गांधी जी की बात का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तुम्हें अहम आ जाये तो अपने से नीचे गरीब को देखो तुम्हारा सारा संदेह मिट जोयगा।

क्या है गैंगरेप का पूरा मामला

  • हाथरस जिले के चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को 4 लोगों ने 19 साल की युवती से गैंगरेप किया था। आरोपियों ने युवती की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
  • युवती के शव का अंतिम संस्कार मंगलवार देर रात भारी पुलिस फोर्स के बीच कर दिया गया था। हालांकि, परिवार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने जबरन उनकी बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया। उन्हें उनका चेहरा भी नहीं दिखाया गया।

पुलिस ने कहा- दो वीडियो सामने आए, इनमें दुष्कर्म की बात नहीं कही गई

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने हाथरस गैंगरेप केस पर कहा कि शासन और पुलिस को बदनाम किया जा रहा है। ऐसे करने वालों के बयानों की हम जांच कर रहे हैं। घटना के दिन के दो वीडियो आज सामने आए हैं। पीड़िता के साथ मारपीट की बात उसमें कही गई है।

उन्होंने कहा कि पीड़ित या उसकी मां ने दुष्कर्म की बात नहीं कही थी। पीड़ित ने एक वीडियो में अपनी जीभ भी दिखाई है जो कटी नहीं थी। 22 सितंबर को पहली बार पीड़िता ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले की चोट और शॉक से मौत की बात कही गई है।

Dailyhunt
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