Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
ITR Filing Guide: घर का किराया चुकाने वाले हर शख्स को मिलेगी टैक्स छूट, बस ओल्ड टैक्स रिजीम में न भूलें यह एक फॉर्म भरना

ITR Filing Guide: घर का किराया चुकाने वाले हर शख्स को मिलेगी टैक्स छूट, बस ओल्ड टैक्स रिजीम में न भूलें यह एक फॉर्म भरना

Girls Globe 6 days ago

मतौर पर हमारे बीच यह एक आम धारणा बनी हुई है कि मकान के किराए (House Rent) पर टैक्स छूट का फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिल सकता है जो किसी कंपनी में नौकरी करते हैं और जिनके सैलरी पैकेज में बकायदा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) शामिल होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि टैक्स का कानून हर उस नागरिक को राहत देता है जो किराए के मकान में रह रहा है?

जी हां, अगर आप नौकरीपेशा नहीं हैं- यानी आप एक सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल, फ्रीलांसर, छोटे या बड़े बिजनेसमैन हैं, या फिर आप नौकरी तो करते हैं लेकिन आपकी कंपनी आपको HRA का कंपोनेंट नहीं देती है, तो भी आप अपने जेब से चुकाए गए किराए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

आयकर अधिनियम की पारंपरिक धारा 80GG और नए नियमों के तहत धारा 134 आपको यह खास सहूलियत देती है। बस ध्यान इस बात का रखना है कि इस छूट का फायदा उठाने के लिए आपको ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनना होगा। आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि इसका पूरा नियम और कैलकुलेशन कैसे काम करता है।

इन 4 शर्तों को पूरा करना है जरूरी

अगर आप इस नियम के तहत अपने किराए पर टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) क्लेम करना चाहते हैं, तो आपको टैक्स विभाग की इन बुनियादी शर्तों पर खरा उतरना होगा:

  • कोई HRA न मिला हो: आपको उस वित्त वर्ष के दौरान अपनी नौकरी, सैलरी या बिजनेस से किसी भी रूप में HRA का लाभ न मिला हो।

  • सच्चा किराया: आप वास्तव में किसी आवासीय संपत्ति (घर, फ्लैट या कमरा) में रह रहे हों और उसका नियमित किराया चुका रहे हों।

  • उसी शहर में खुद का घर न हो: जिस शहर में आप रहते हैं या अपना काम/बिजनेस करते हैं, वहां आपके नाम पर, आपके पति या पत्नी के नाम पर, आपके नाबालिग बच्चे के नाम पर या आपके हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के नाम पर कोई भी अपना मकान नहीं होना चाहिए।

  • फॉर्म 10BA सबमिट करना: अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय या उससे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर Form 10BA भरना आपके लिए अनिवार्य है।

सामान्य HRA छूट और धारा 80GG में क्या अंतर है?

दोनों ही नियम किराए के मकान पर टैक्स बचाने के लिए हैं, लेकिन इनके काम करने के तरीके और सीमाओं में बड़ा फर्क होता है:

टैक्स छूट का कैलकुलेशन कैसे होता है?

आयकर विभाग आपकी कुल सालाना बचत तय करने के लिए नीचे दिए गए तीन अलग-अलग फॉर्मूलों का इस्तेमाल करता है। इन तीनों कैलुकलेशन में से जो राशि सबसे कम निकलकर आएगी, उसे ही टैक्स छूट (Deduction) के रूप में मंजूरी दी जाएगी:

  1. एक तय रकम जो कि ₹5,000 प्रति महीना या ₹60,000 प्रति वर्ष है।

  2. आपकी कुल ‘Adjusted Gross Income’ का 25 प्रतिशत हिस्सा।

  3. आपके द्वारा सालभर में चुकाया गया वास्तविक किराया, जिसमें से आपकी कुल इनकम का 10 प्रतिशत हिस्सा घटा दिया गया हो।

स्क्रूटनी से बचना है तो पास रखें ये 5 दस्तावेज

टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से किसी भी तरह का नोटिस या पूछताछ से बचने के लिए आपके पास नीचे लिखे सबूत होने चाहिए, ताकि आप जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखा सकें:

  • मकान मालिक के साथ किया गया वैध रेंट एग्रीमेंट या लीज डीड।

  • मकान मालिक के हस्ताक्षर वाली किराए की रसीदें (Rent Receipts)।

  • कैश के बजाय बैंक ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, यूपीआई या चेक से भुगतान का रिकॉर्ड।

  • मकान मालिक का पैन (PAN): अगर आपका सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा बैठता है, तो मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर देना जरूरी है।

  • ऑनलाइन भरा हुआ फॉर्म 10BA, जिसमें आप यह घोषणा करते हैं कि आप इस छूट की सभी शर्तें पूरी करते हैं।

टैक्सपेयर्स अक्सर क्या गलतियां करते हैं?

  • फॉर्म 10BA को नजरअंदाज करना: सबसे आम गलती यह होती है कि लोग ITR फाइल करते समय डिडक्शन तो क्लेम कर लेते हैं, लेकिन फॉर्म 10BA ऑनलाइन सबमिट करना भूल जाते हैं। ऐसे मामलों में टैक्स विभाग क्लेम को तुरंत रिजेक्ट कर देता है।

  • पूरा किराया क्लेम कर देना: कुछ लोग बिना नियम समझे अपने द्वारा चुकाया गया पूरा का पूरा सालाना किराया (जैसे ₹1.5 लाख या ₹2 लाख) फॉर्म में भर देते हैं। जबकि नियम के मुताबिक आपको अधिकतम ₹60,000 की ही छूट मिल सकती है।

  • कैश में बड़ा पेमेंट करना: बिना किसी रसीद या पुख्ता रेंट एग्रीमेंट के मकान मालिक को कैश में मोटा किराया चुकाने वाले लोगों पर टैक्स विभाग की नजर जल्दी पड़ती है। हमेशा कोशिश करें कि अपने किराए का भुगतान डिजिटल माध्यमों से ही करें ताकि आपके पास एक पक्का रिकॉर्ड रहे।

अगर आप भी इस दायरे में आते हैं, तो इस बार अपना आईटीआर दाखिल करते समय ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत धारा 80GG का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें और अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा टैक्स में जाने से बचाएं।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Girls Globe Hindi