Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
केसर की खेती बनाएगी लखपति: 1 किलो के मिलते हैं 3 से 5 लाख रुपये, जानिए इनडोर एरोपोनिक्स से खेती करने का तरीका

केसर की खेती बनाएगी लखपति: 1 किलो के मिलते हैं 3 से 5 लाख रुपये, जानिए इनडोर एरोपोनिक्स से खेती करने का तरीका

Girls Globe 2 weeks ago

केसर (Saffron / Crocus sativus) को कृषि जगत में 'रेड गोल्ड' कहा जाता है। वजन के हिसाब से यह दुनिया का सबसे महंगा खाद्य उत्पाद और मसाला है। बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध मोंगरा केसर की कीमत 3 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (और रिटेल/एक्सपोर्ट में ₹6 लाख/किग्रा तक) आसानी से मिल जाती है।

केसर के इतना महंगा होने की मुख्य वजह इसकी दुर्लभता और मेहनत है। केसर के एक फूल से केवल 3 लाल रेशे (Stigmas) निकलते हैं। मात्र 1 किलोग्राम सूखा केसर तैयार करने के लिए लगभग 1.5 लाख से 1.7 लाख फूलों की हाथों से तुड़ाई करनी पड़ती है। भारत में जहां सालाना 5 से 6 टन केसर का उत्पादन होता है, वहीं घरेलू और वैश्विक मांग इससे कई गुना अधिक है।

पारंपरिक रूप से केसर की खेती केवल कश्मीर की ठंडी जलवायु और करेवा मिट्टी (Pampore) में ही संभव मानी जाती थी। लेकिन आधुनिक कृषि क्रांति और 'एरोपोनिक्स इनडोर फार्मिंग' (Aeroponic & Climate-Controlled Indoor Cultivation) ने इस भूगोल को पूरी तरह बदल दिया है। अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार या मध्य प्रदेश जैसे किसी भी राज्य में किसान और युवा उद्यमी 10×10 या 20×20 फीट के साधारण कमरे में कश्मीर जैसा कृत्रिम वातावरण (तापमान, आर्द्रता और प्रकाश) तैयार करके केसर की बंपर पैदावार ले रहे हैं।

इनडोर केसर की खेती के लिए मिट्टी या खेत की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह हवा और वर्टिकल ट्रे में उगाई जाती है:

  • थर्मल इंसुलेटेड रूम: 200 से 500 वर्ग फीट के कमरे में पीयूएफ (PUF) पैनल्स या इंसुलेशन लगाया जाता है ताकि बाहरी तापमान का असर अंदर न हो।

  • तापमान और आर्द्रता नियंत्रण (HVAC System): केसर के विकास के लिए तापमान को 10°C से 20°C और फूलों के खिलने के समय 15°C से 17°C पर स्थिर रखना होता है। इसके लिए इनवर्टर एसी, चिलर और ऑटोमैटिक ह्यूमिडिफायर (65% से 80% आर्द्रता बनाए रखने के लिए) लगाए जाते हैं।

  • वर्टिकल मल्टी-टियर रेक्स: लोहे या एल्युमिनियम के 4 से 6 लेयर वाले स्टैंड्स में प्लास्टिक या लकड़ी की ट्रे रखी जाती हैं, जिससे कम जगह में 5 गुना अधिक पौधे आ सकें।

  • फुल स्पेक्ट्रम फोटो-पीरियड एलईडी लाइट्स: पौधों को दिन और रात के प्रकाश चक्र (Photoperiod) का अहसास कराने के लिए विशेष ग्रो-लाइट्स लगाई जाती हैं।

1. उत्तम क्वालिटी के कॉर्ब्स (Corms / बल्ब) की खरीद:

केसर के बीज नहीं होते, बल्कि इसकी खेती कंद (Corms) से होती है। कश्मीर (पंपोर/पुलवामा) से स्वस्थ और फंगस-मुक्त कंद खरीदे जाते हैं, जिनका वजन कम से कम 8 से 10 ग्राम या उससे अधिक होना चाहिए।

2. कंदों की छंटाई और एंटी-फंगल ट्रीटमेंट:

कंदों को कमरे में लगाने से पहले ट्राइकोडर्मा या कार्बेंडाजिम जैसे फफूंदनाशक घोल से उपचारित किया जाता है ताकि उनमें सड़न न लगे।

3. वर्टिकल ट्रे में कंदों की सजावट (जुलाई-अगस्त):

उपचारित कंदों को ट्रे में बिना मिट्टी के पास-पास सजा दिया जाता है। इस दौरान कमरे का तापमान 18°C से 22°C रखा जाता है।

4. फ्लावरिंग और तापमान ट्रिगर (सितंबर-अक्टूबर):

सितंबर के अंत तक तापमान को घटाकर 15°C लाया जाता है और नमी बढ़ाई जाती है। यह प्रक्रिया कंदों को कश्मीर के पतझड़ का अहसास कराती है, जिससे कंदों से अंकुर निकलकर 15 से 20 दिनों में बैंगनी रंग के फूल खिलने लगते हैं।

5. फूलों की तुड़ाई और केसर सुखाना (अक्टूबर-नवंबर):

फूल खिलते ही सुबह के समय उनके अंदर से तीन लाल रेशे (केसर) चिमटी की मदद से निकाल लिए जाते हैं। इसके बाद इन्हें इलेक्ट्रिक ड्रायर या वैक्यूम ओवन में 40°C से 45°C पर सुखाकर एयरटाइट ग्लास जार में पैक कर लिया जाता है।

6. कॉर्ब्स का गुणन और साइकिल (दिसंबर-मई):

फसल लेने के बाद इन कंदों को मिट्टी के शेड या नर्सरी में लगा दिया जाता है, जहां एक कंद से 2 से 3 नए बेबी कंद तैयार हो जाते हैं। अगले सीजन में इन कंदों का दोबारा इस्तेमाल होता है।

  • शुरुआती निवेश: 300 से 500 वर्ग फीट के इनडोर रूम सेटअप, एसी, लाइट्स, ट्रे और 500 से 800 किग्रा कंद खरीदने में लगभग ₹4 लाख से ₹7 लाख का एकमुश्त खर्च आता है।

  • केसर का उत्पादन: 500 किग्रा प्रीमियम कंदों से पहले ही साल में लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम सूखा केसर प्राप्त होता है।

  • वार्षिक कमाई: 1.5 किलो शुद्ध ग्रेड-1 केसर बेचने पर ₹4.5 लाख से ₹6 लाख तक का सीधा राजस्व मिलता है। इसके साथ ही कंदों की संख्या दोगुनी होने से अगले साल कंद खरीदने का खर्च शून्य हो जाता है।

  • सरकारी योजनाएं: 'राष्ट्रीय कृषि विकास योजना' (RKVY) और विभिन्न राज्य बागवानी मिशनों के तहत वर्टिकल फार्मिंग, कोल्ड रूम और हाई-वैल्यू मसालों की खेती पर 30% से 50% तक की सब्सिडी और आसान बैंक ऋण उपलब्ध हैं।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Girls Globe Hindi