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नींद में चलना महज आदत नहीं, हो सकती है बड़ी बीमारी का संकेत! जानें 'स्लीपवॉकिंग' का पूरा सच और बचाव के तरीके

नींद में चलना महज आदत नहीं, हो सकती है बड़ी बीमारी का संकेत! जानें 'स्लीपवॉकिंग' का पूरा सच और बचाव के तरीके

Girls Globe 1 month ago

क्या आपने कभी सोचा है कि कोई व्यक्ति गहरी नींद में होते हुए भी अचानक बिस्तर से उठकर चलने लगे, दरवाजा खोल दे या घर के बाहर तक निकल जाए और अगली सुबह उसे इस बात का जरा भी अंदाजा न हो?

सुनने में यह किसी थ्रिलर फिल्म के सीन जैसा लग सकता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में यह एक वास्तविक और गंभीर स्थिति है। इसे ‘स्लीपवॉकिंग’ (Somnambulism) कहा जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति एक ऐसी अवस्था में होता है जहां उसका शरीर तो सक्रिय होता है, लेकिन दिमाग का एक हिस्सा गहरी नींद में सोया रहता है।

क्यों जाग जाता है शरीर, जबकि सोता रहता है दिमाग?

विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी नींद मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटी होती है-REM (Rapid Eye Movement) और Non-REM। स्लीपवॉकिंग की घटना आमतौर पर रात के पहले पहर में होती है, जब हम गहरी नींद यानी Non-REM स्टेज में होते हैं। इस दौरान मस्तिष्क का वह हिस्सा जो शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है, सक्रिय हो जाता है, जबकि चेतना और स्मृति वाला हिस्सा सुप्त अवस्था में रहता है। यही कारण है कि स्लीपवॉकर सामान्य गतिविधियां जैसे चलना, कपड़े बदलना या दरवाजे खोलना तो कर सकता है, लेकिन उसे होश नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है।

स्लीपवॉकिंग के पीछे छिपे हैं ये मुख्य कारण

नींद में चलने की समस्या अक्सर बच्चों में अधिक देखी जाती है, क्योंकि उनका तंत्रिका तंत्र विकसित हो रहा होता है, लेकिन वयस्कों में भी यह काफी आम है। इसके पीछे कई ट्रिगर्स हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारणों में नींद की भारी कमी (Sleep Deprivation), अत्यधिक मानसिक तनाव और चिंता शामिल हैं। इसके अलावा, अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो जेनेटिक कारणों से भी यह आप तक पहुंच सकती है। कई बार तेज बुखार, शराब का सेवन या कुछ विशेष दवाइयों के साइड इफेक्ट्स भी व्यक्ति को नींद में चलने पर मजबूर कर देते हैं।

बड़ी बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है ‘नींद में चलना’

हालांकि कई मामलों में स्लीपवॉकिंग सामान्य होती है और समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंसोमनिया (Insomnia), स्लीप एपेनिया (Sleep Apnea), एंग्जायटी या डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह न्यूरोलॉजिकल स्थितियों की ओर भी इशारा करता है। इसके साथ ही, नींद में चलने वाले व्यक्ति के लिए चोट लगने, ऊंचाई से गिरने या घर से बाहर निकलकर किसी हादसे का शिकार होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

स्लीपवॉकर के साथ कैसा हो आपका व्यवहार?

अगर आपके घर में कोई व्यक्ति नींद में चल रहा है, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे बड़ी सावधानी यह है कि उसे कभी भी झटके से न जगाएं। अचानक जगाने पर व्यक्ति घबरा सकता है, हिंसक हो सकता है या उसे मानसिक आघात लग सकता है। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि उसे धीरे से हाथ पकड़कर वापस उसके बिस्तर तक ले जाएं। घर की सुरक्षा के लिए रात को दरवाजे और खिड़कियां अच्छी तरह लॉक रखें और फर्श पर ऐसी चीजें न छोड़ें जिनसे टकराकर वह गिर सके।

डॉक्टर की सलाह कब बन जाती है जरूरी?

यदि स्लीपवॉकिंग की समस्या हफ्ते में दो या तीन बार से अधिक होने लगे, तो यह डॉक्टर से मिलने का सही समय है। इसके अलावा, अगर व्यक्ति नींद में हिंसक व्यवहार करने लगे, खुद को या दूसरों को चोट पहुंचा दे, या दिनभर बहुत ज्यादा थकान महसूस करे, तो तुरंत स्लीप स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए। एक नियमित स्लीप रूटीन अपनाकर, सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाकर और तनाव को नियंत्रित करके इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

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