Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
PK की एंट्री से पलटा बांकीपुर का खेल? समर्थकों का दावा- '1 लाख वोटों से जीत तय

PK की एंट्री से पलटा बांकीपुर का खेल? समर्थकों का दावा- '1 लाख वोटों से जीत तय

Girls Globe 1 week ago

बिहार की सियासत में इस समय सबसे बड़ा भूचाल पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर आ चुका है। जहां एक तरफ भाजपा इस क्षेत्र को अपना अभेद्य किला मानती रही है, वहीं जन सुराज पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने और खुद प्रशांत किशोर (PK) के यहां से सीधे ताल ठोकने के बाद पूरी बाजी पलटती हुई दिख रही है।

चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही बांकीपुर की गलियों में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। प्रशांत किशोर के समर्थकों ने अभी से एकतरफा माहौल का दावा करते हुए नारा बुलंद कर दिया है कि ‘इस बार जीत 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से होगी।’ यह दावा महज एक चुनावी नारा है या जमीनी हकीकत, इसने भाजपा और राजद (RJD) दोनों खेमों की नींद जरूर उड़ा दी है।

प्रशांत किशोर का ‘फर्स्ट इलेक्शन’ और भाजपा के किले में सेंध की तैयारी

चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पहली बार खुद किसी चुनाव में उम्मीदवार के रूप में जनता के सामने हैं। बांकीपुर सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां से लगातार 5 बार जीत दर्ज करने वाले भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नवीन को राज्यसभा भेजकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर दिया गया है।

भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए युवा चेहरे अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि राजद की ओर से रेखा गुप्ता चुनौती दे रही हैं। लेकिन प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री ने इस पारंपरिक मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। पीके के समर्थकों का कहना है कि बांकीपुर की जनता अब जाति और धर्म की पुरानी राजनीति से ऊब चुकी है और इस बार बदलाव के लिए रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग करेगी।

बांकीपुर उपचुनाव: नीतीश-सम्राट सरकार के लिए ‘लिटमस टेस्ट’

प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को महज एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार की मौजूदा एनडीए (NDA) सरकार के कामकाज पर एक ‘रेफरेंडम’ यानी जनमत संग्रह करार दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह उपचुनाव साख की लड़ाई बन चुका है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि बांकीपुर पटना का सबसे शिक्षित और शहरी इलाका माना जाता है, इसलिए यहां का वोटर जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर वोट करता रहा है। यही वजह है कि भाजपा जहां अपने पुराने विकास कार्यों और मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स के दम पर जीत का दावा कर रही है, वहीं जन सुराज पार्टी शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर सीधे वोटरों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

क्या त्रिकोणीय मुकाबले में बिखर जाएगा विपक्ष का वोट बैंक?

बांकीपुर का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहां भाजपा को हमेशा करीब 60% के आसपास एकमुश्त वोट मिलते रहे हैं, जबकि विपक्ष 30% के फेर में फंसा रहता है। इस बार आरजेडी की रेखा गुप्ता और जनशक्ति जनता दल की ओर से वीना मानवी भी मैदान में हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर भाजपा के पारंपरिक शहरी वोट बैंक (विशेषकर कायस्थ और वैश्य मतदाता) में सेंध लगा पाएंगे, या फिर विपक्ष के वोटों का बिखराव एक बार फिर भाजपा के लिए राह आसान कर देगा?

फिलहाल, समर्थकों का ‘1 लाख वोटों से जीत’ का यह बड़ा दावा जमीन पर कितना तब्दील होता है, यह तो आने वाली 3 अगस्त को नतीजों के साथ ही साफ हो पाएगा।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Girls Globe Hindi