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PM मोदी के AI मॉर्फ्ड वीडियो पर आया Meta का बड़ा बयान, FIR दर्ज होते ही सोशल मीडिया दिग्गज ने टेके घुटने

PM मोदी के AI मॉर्फ्ड वीडियो पर आया Meta का बड़ा बयान, FIR दर्ज होते ही सोशल मीडिया दिग्गज ने टेके घुटने

Girls Globe 2 months ago

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज और डीपफेक वीडियो को लेकर देश में चल रही बड़ी कानूनी लड़ाई के बीच एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किए गए मॉर्फ्ड वीडियो के इंटरनेट पर वायरल होने के बाद मचे भारी राजनीतिक और प्रशासनिक बवाल पर आखिरकार मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा इस मामले में सख्त धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने के तुरंत बाद मेटा के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी कर साफ किया है कि वे इस गंभीर मामले को लेकर भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरी तरह से खड़े हैं और जांच में हर संभव तकनीकी मदद दे रहे हैं।

एफआईआर दर्ज होते ही एक्शन में आई दिल्ली पुलिस और मेटा पर बढ़ा दबाव

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक भ्रामक और एआई की मदद से छेड़छाड़ किया गया वीडियो तेजी से प्रसारित किया जा रहा था, जिससे आम जनता के बीच गलत संदेश जा रहा था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सुरक्षा एजेंसियों की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने मेटा, एक्स (ट्विटर) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानूनी नोटिस भेजकर उस सोर्स अकाउंट की डिटेल मांगी थी जहां से यह वीडियो पहली बार अपलोड और शेयर किया गया था। इस कड़े कानूनी शिकंजे के बाद मेटा को तुरंत सामने आना पड़ा।

डीपफेक और एआई मॉर्फ्ड कंटेंट पर मेटा की क्या है वैश्विक पॉलिसी

मेटा के प्रवक्ता ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हमारे प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप) पर किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व या नागरिकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले और गुमराह करने वाले एआई जनित कंटेंट के लिए कोई जगह नहीं है। हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं। जैसे ही हमें दिल्ली पुलिस की तरफ से आधिकारिक नोटिस मिला, हमारी ग्लोबल थ्रेट इंटेलिजेंस और लीगल टीम ने उस पर काम शुरू कर दिया है। हम जांच अधिकारियों को जरूरी यूजर डेटा, आईपी एड्रेस और लॉग डिटेल्स मुहैया करा रहे हैं ताकि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।” कंपनी ने यह भी दावा किया कि उनके ऑटोमेटेड सिस्टम ने इस वीडियो की पहुंच को पहले ही काफी हद तक ब्लॉक कर दिया था।

जेनरेटिव एआई और फेक न्यूज के इस दौर में आम यूजर्स के लिए क्या है सबक

इस हाई-प्रोफाइल मामले ने भारत में ज्योग्राफिकल (लोकल) और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के दौर में साइबर कानूनों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। साइबर लॉ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अब डीपफेक और मॉर्फ्ड वीडियो बनाने तथा उसे फॉरवर्ड करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। ऐसे में लोकल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां बेहद मुस्तैद हैं। आम सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी यह एक बड़ी चेतावनी है कि वे बिना जांच-परख के किसी भी राजनीतिक या संवेदनशील एआई वीडियो को अपने प्रोफाइल से शेयर या फॉरवर्ड न करें, अन्यथा वे भी अनजाने में बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं।

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