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रामायण के अनसुने रहस्य श्री राम और लक्ष्मण के अवतार के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है किसके स्वरूप थे भरत और शत्रुघ्न?

रामायण के अनसुने रहस्य श्री राम और लक्ष्मण के अवतार के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है किसके स्वरूप थे भरत और शत्रुघ्न?

Girls Globe 1 month ago

News India Live, Digital Desk: भारतीय संस्कृति में भगवान श्री राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है। उनके आदर्श चरित्र और धर्मपरायणता के कारण ही उन्हें यह गौरवपूर्ण संज्ञा दी गई है।

वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के अनुसार, अयोध्या नरेश राजा दशरथ के चार पुत्र थे, जिन्हें साक्षात भगवान विष्णु का ही अंश माना जाता है। वैसे तो यह सर्वविदित है कि श्री राम भगवान विष्णु के और लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार थे, लेकिन भरत और शत्रुघ्न के अलौकिक स्वरूप को लेकर बहुत कम लोग जानते हैं। आखिर ये दोनों भाई किसके अवतार थे? आइए जानते हैं इस पौराणिक रहस्य के बारे में।

चार राजकुमार और उनकी माताएं: पुत्रकामेष्टि यज्ञ का फल

अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं- कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन चारों राजकुमारों का जन्म पुत्रकामेष्टि यज्ञ से प्राप्त प्रसाद (खीर) के फलस्वरूप हुआ था।

माता कौशल्या: इनकी कोख से साक्षात विष्णु स्वरूप भगवान श्री राम ने जन्म लिया।

माता कैकेयी: इनके पुत्र भरत थे, जो त्याग और भक्ति की प्रतिमूर्ति माने जाते हैं।

माता सुमित्रा: सुमित्रा के दो तेजस्वी पुत्र हुए- लक्ष्मण और शत्रुघ्न।

किसके अवतार थे भरत जी? सुदर्शन चक्र का अलौकिक रूप

धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, भरत जी को भगवान विष्णु के सबसे शक्तिशाली अस्त्र ‘सुदर्शन चक्र’ का अवतार माना गया है। जिस प्रकार सुदर्शन चक्र अधर्म का विनाश कर धर्म की रक्षा करता है, उसी प्रकार भरत ने प्रभु राम की अनुपस्थिति में अयोध्या की व्यवस्था को अक्षुण्ण रखा। जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास पर गए, तब भरत ने राजपाट स्वीकार करने के बजाय प्रभु की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखा और स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी की भांति रहे। माना जाता है कि सुदर्शन चक्र का गुण ‘तेज और शासन’ है, इसीलिए अयोध्या के कठिन समय में शासन संभालने का सामर्थ्य सुदर्शन के अवतार भरत में ही था।

पांचजन्य शंख के अवतार माने जाते हैं शत्रुघ्न

प्रभु श्री राम के सबसे छोटे भाई शत्रुघ्न को भगवान विष्णु के हाथ में सुशोभित ‘पाञ्चजन्य शंख’ का अवतार माना जाता है। शंख को विजय, मंगल और शांति का प्रतीक माना जाता है। शत्रुघ्न का व्यक्तित्व भी वैसा ही शांत लेकिन अडिग था। जिस प्रकार शंख की ध्वनि नकारात्मकता को दूर करती है, उसी प्रकार शत्रुघ्न ने हमेशा मौन रहकर सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने बड़े भाई भरत की सेवा को ही अपना परम धर्म माना और राज्य की आंतरिक सुरक्षा में एक रक्षक की भूमिका निभाई।

क्यों खास है चारों भाइयों का अवतार?

रामायण केवल एक गाथा नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना का मार्ग है। भगवान विष्णु ने जब राम रूप में अवतार लिया, तो उनके आयुधों (शस्त्रों) और पार्षदों ने भी उनके साथ पृथ्वी पर जन्म लिया। शेषनाग लक्ष्मण के रूप में, सुदर्शन चक्र भरत के रूप में और पाञ्चजन्य शंख शत्रुघ्न के रूप में प्रकट हुए। यह अद्भुत संयोग दर्शाता है कि जब सत्य की स्थापना होती है, तो संपूर्ण ब्रह्मांडीय शक्तियां एक साथ मिलकर कार्य करती हैं। चारों भाइयों का प्रेम और समर्पण आज भी विश्व के लिए पारिवारिक एकता की सबसे बड़ी मिसाल है।

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