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Russia-Ukraine War : पुतिन के साथ खड़े नजर आए डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान तानाशाहों का साथ नहीं देगा अमेरिका

Russia-Ukraine War : पुतिन के साथ खड़े नजर आए डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान तानाशाहों का साथ नहीं देगा अमेरिका

Girls Globe 1 week ago

News India Live, Digital Desk: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राजनीति में आए एक नए मोड़ ने दुनिया भर के राजनयिकों को चौंका दिया है। यूक्रेन में अमेरिकी राजदूत ब्रिजेट ब्रिंक (Bridget Brink) ने एक कड़ा और स्पष्ट संदेश जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका कभी भी 'तानाशाहों' का साथ नहीं देगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति ‘नरम’ रुख के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिंक का यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप की संभावित विदेश नीति और यूक्रेन के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।

ब्रिजेट ब्रिंक का कड़ा रुख: ‘लोकतंत्र के साथ खड़ा रहेगा अमेरिका’

राजदूत ब्रिजेट ब्रिंक ने अपने संबोधन में साफ किया कि अमेरिकी विदेश नीति की नींव लोकतांत्रिक मूल्यों और संप्रभुता की रक्षा पर टिकी है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए संकेत दिया कि घरेलू राजनीति में चाहे कोई भी विमर्श चल रहा हो, लेकिन यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य और आर्थिक मदद में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर आज तानाशाही ताकतों को नहीं रोका गया, तो भविष्य में वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। यह बयान कीव में अमेरिकी दूतावास की ओर से यूक्रेन के मनोबल को बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

पुतिन और ट्रंप के बीच ‘बढ़ती नजदीकियां’ बनी चिंता का विषय?

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कई मंचों से यह दावा किया है कि यदि वह सत्ता में होते, तो रूस-यूक्रेन युद्ध 24 घंटे के भीतर रुक गया होता। उनके इस दावे और पुतिन की सैन्य रणनीति की अतीत में की गई प्रशंसा को लेकर डेमोक्रेटिक खेमे और यूरोपीय देशों में डर का माहौल है। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा यूक्रेन को अकेला छोड़ सकता है, जिससे रूस को अपनी शर्तें थोपने का मौका मिल जाएगा। ब्रिंक के ताजा बयान को इसी ‘ट्रंप फैक्टर’ के खिलाफ एक मजबूत कूटनीतिक कवच के रूप में देखा जा रहा है।

यूक्रेन में बढ़ता तनाव और पश्चिमी देशों की एकजुटता

युद्ध के मैदान में रूस की बढ़ती आक्रामकता के बीच पश्चिमी देशों की एकजुटता ही यूक्रेन की सबसे बड़ी ताकत रही है। ब्रिंक का यह बयान नाटो (NATO) सहयोगियों को भी यह आश्वस्त करने के लिए है कि अमेरिका की आधिकारिक नीति अभी भी यूक्रेन के साथ है। हालांकि, अमेरिका में आगामी चुनावों के मद्देनजर विदेशी मदद को लेकर छिड़ी बहस ने जेलेंस्की सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब देखना यह होगा कि व्हाइट हाउस और विदेश विभाग आने वाले दिनों में ट्रंप के ‘पुतिन प्रेम’ के दावों पर किस तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं।

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