News India Live, Digital Desk: चने से बना सत्तू प्रोटीन, फाइबर और आयरन का खजाना है। इसे 'गरीबों का प्रोटीन' भी कहा जाता है, लेकिन गलत तरीके से पीने पर यह पेट में गैस या भारीपन भी पैदा कर सकता है।सत्तू पीने का सही तरीका (The Right Way)घोल की कंसिस्टेंसी: सत्तू को हमेशा बहुत गाढ़ा नहीं बनाना चाहिए।
न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, इसे पतले घोल के रूप में पीना ज्यादा फायदेमंद है ताकि यह आसानी से पच सके।चीनी या नमक?नमकीन सत्तू: यदि आप वजन कम करना चाहते हैं या डायबिटीज के मरीज हैं, तो सत्तू के घोल में काला नमक, भुना जीरा, नींबू और बारीक कटा प्याज मिलाकर पिएं।मीठा सत्तू: ऊर्जा के लिए गुड़ या शक्कर मिलाया जा सकता है, लेकिन सफेद चीनी से बचना बेहतर है।मसालों का उपयोग: सत्तू की तासीर ठंडी होती है। इसमें भुना हुआ जीरा और पुदीना मिलाने से यह पाचन (Digestion) में और भी सुधार करता है।सेवन का सही समयसुबह खाली पेट: सुबह के समय सत्तू पीना पेट को ठंडा रखता है और दिन भर के लिए एनर्जी देता है।ब्रेकफास्ट के रूप में: यदि आपके पास नाश्ता बनाने का समय नहीं है, तो एक गिलास सत्तू का शरबत एक संपूर्ण भोजन का काम कर सकता है।वर्कआउट के बाद: जिम या भारी काम के बाद प्रोटीन ड्रिंक के रूप में सत्तू का सेवन मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है।सावधानियां: इन्हें नहीं पीना चाहिएरात के समय: सत्तू भारी होता है, इसलिए रात को इसे पीने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पचने में समय लेता है।पथरी के मरीज: जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना सत्तू नहीं लेना चाहिए।गैस की समस्या: यदि आपको बार-बार ब्लोटिंग या गैस होती है, तो सत्तू में हींग और काला नमक जरूर मिलाएं।सत्तू के मुख्य फायदेनेचुरल कूलर: यह शरीर के तापमान को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करता है।वजन घटाने में सहायक: फाइबर की अधिकता के कारण इसे पीने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती।ग्लाइसेमिक इंडेक्स: इसका जीआई (GI) कम होता है, जो शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करता है।

