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UP Cabinet Decision: शाहजहांपुर का जलालाबाद अब 'परशुराम पुरी', योगी कैबिनेट ने दी नाम बदलने को मंजूरी, जानिए पूरा इतिहास

UP Cabinet Decision: शाहजहांपुर का जलालाबाद अब 'परशुराम पुरी', योगी कैबिनेट ने दी नाम बदलने को मंजूरी, जानिए पूरा इतिहास

Girls Globe 2 weeks ago

त्तर प्रदेश सरकार ने शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए इस फैसले की वजह, नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया और ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लंबे समय से चल रही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सरकार के इस फैसले के बाद जलालाबाद अब आधिकारिक रूप से परशुराम पुरी के नाम से जाना जाएगा।

कैबिनेट बैठक में लगी अंतिम मुहर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। जलालाबाद का नाम बदलने की पहल कई वर्ष पहले शुरू हुई थी और विभिन्न प्रशासनिक व संवैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद अब इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।

2018 में शुरू हुई थी नाम बदलने की प्रक्रिया

जलालाबाद का नाम परशुराम पुरी करने का प्रस्ताव सबसे पहले मार्च 2018 में शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में पारित किया गया था। इसके बाद सितंबर 2023 में भी बोर्ड ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति के साथ प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा, जिसके बाद इसे केंद्र सरकार के पास अग्रेषित किया गया।

केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2025 को इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की थी। अब उत्तर प्रदेश कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के साथ नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

भगवान परशुराम की जन्मस्थली माने जाने का दावा

जलालाबाद को कई पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में भगवान परशुराम की जन्मस्थली बताया जाता है। इसी आधार पर वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्थान को आधिकारिक रूप से परशुराम जन्मभूमि घोषित किया था। यहां भगवान परशुराम का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जिसे हजारों वर्ष पुराना माना जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

जलालाबाद नाम के पीछे क्या है इतिहास?

जलालाबाद नाम को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। एक प्रमुख मत के अनुसार, इस कस्बे का नाम मुगल सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के सम्मान में जलालाबाद रखा गया था। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग ऐतिहासिक मत भी सामने आते रहे हैं।

मुगल शासन में अहम प्रशासनिक और सैन्य केंद्र था यह इलाका

इतिहासकारों के अनुसार, मुगल काल में यह क्षेत्र दिल्ली, अवध और बंगाल को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों के निकट स्थित होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था। उस समय जलालाबाद मुगल सेना के आवागमन और ठहराव का प्रमुख केंद्र माना जाता था। अकबर के शासनकाल में यहां प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की गई और इसे सैन्य गतिविधियों के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में विकसित किया गया।

नाम परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही थी मांग

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से जलालाबाद का नाम भगवान परशुराम की पहचान से जोड़ने की मांग उठती रही थी। नगर पालिका परिषद से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रशासनिक अभिलेखों और आधिकारिक दस्तावेजों में भी धीरे-धीरे नया नाम लागू किया जाएगा।

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