News India Live, Digital Desk : महिला सशक्तिकरण की दिशा में आज भारतीय संसद में एक निर्णायक अध्याय शुरू हुआ है। केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के प्रस्ताव के साथ तीन संशोधन बिल पेश किए हैं।
इन बिलों का लक्ष्य 2029 के चुनावों से महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही राजनीतिक गलियारों में ‘जातिगत जनगणना’ और ‘परिसीमन’ को लेकर तीखी बहस भी छिड़ गई है।
संशोधन बिल की मुख्य बातें: क्या बदलेगा?
आरक्षण का स्वरूप: लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
सीटों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी: प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा सांसदों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है।
विभाजन: राज्यों में 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। इसमें से 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
आधार और परिसीमन: सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन (Delimitation) किया जाएगा, जिसके लिए 2011 के आंकड़ों को आधार बनाया जा सकता है।
सपा का रुख: “गुप्त लोगों की गुप्त योजना”
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बिल का समर्थन तो किया है, लेकिन सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
जनगणना से बचने की कोशिश: अखिलेश यादव का आरोप है कि सरकार जल्दबाजी में बिल लाकर जातिवार जनगणना की मांग को दबाना चाहती है।
पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा: उन्होंने कहा कि यह “सशक्तिकरण नहीं बल्कि तुष्टीकरण” है। उनके अनुसार, अगर पिछड़ी आबादी 66% है, तो केवल 33% आरक्षण देकर बाकी महिलाओं के हक छीने जा रहे हैं।
कोटा के भीतर कोटा: सपा प्रमुख ने मांग की कि आरक्षण के भीतर दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए।
प्रधानमंत्री का संदेश: “राष्ट्र का सम्मान”
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सत्र को महिला शक्ति को समर्पित बताया। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं:
“हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है। आज से शुरू हो रहा यह विशेष सत्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए तैयार है।”
पीएम ने प्राचीन ऋचाओं का हवाला देते हुए महिलाओं को संसार को आलोकित करने वाली ‘दिव्य शक्ति’ बताया और कहा कि सरकार इस दिशा में दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रही है।
आगे की चुनौती: परिसीमन और समय सीमा
विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि आरक्षण 2029 से पहले लागू नहीं होगा। परिसीमन की प्रक्रिया और जनगणना के अभाव में सीटों का निर्धारण कैसे होगा, यह अभी भी एक तकनीकी और राजनीतिक पहेली बनी हुई है। तीन दिवसीय इस विशेष सत्र में यह बिल भारतीय राजनीति की नई दिशा तय करेगा।
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