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"गली बॉय" के बाद अब "गटर बॉय" ने बटोरी सुर्खियां

मुंबई : कॉमेडी फिल्म "उमाकांत पांडेय पुरुष या..?" से चर्चा में आए अभिनेता अजीत कुमार आजकल अपनी दूसरी फिल्म "गटर बॉय" को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। फ़िल्म 'गटर बॉय - ए जर्नी टू हेल' को ब्रिज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, ग्रीस, दरभंगा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सहित कई फिल्म समारोहों में ऑफिशियल एंट्री के रूप में चुना गया है।

खास बात यह है कि इस फ़िल्म ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशन, सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ कहानी की कैटगरी में अपना नामांकन हासिल किया है। और अब यूकेएएफएफ (UKAFF) फ़िल्म फेस्टिवल में गटर बॉय का प्रीमियर 28 मई को शाम 7 बजे होने जा रहा है। 58 मिनट की इस हिंदी फ़िल्म के ट्रेलर को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके ट्रेलर की शुरुआत इस डायलॉग से होती है। "एक बार फिर म्युनिस्पल कॉर्पोरेशन के 2 कर्मचारी गटर की सफाई करते हुए मारे गए।"

निर्देशक अनुपम खन्ना बसवाल की रियलिस्टिक फ़िल्म गटर बॉय में अजीत कुमार एक गटर बॉय का चुनौतियों भरा टाइटल रोल निभा रहे हैं।

कुछ लोग अब भी अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर 'गटर' और 'नाले' की सफाई का काम करते हैं। इस फ़िल्म का केंद्रीय किरदार संदीप एक गरीब, निचली जाति के परिवार का है। वह बेहतर जीवन की आशा में बड़े शहर में चला जाता है, जहां उसे गटर क्लीनर की नौकरी दी जाती है।

कुछ बदकिस्मत लोग ऐसे हैं जो इंसानों द्वारा पैदा की गई गंदगी को साफ करते हैं। संदीप भी एक ऐसा ही किरदार है। कुछ लोग कैसे अब भी अमानवीय काम करने को विवश हैं फ़िल्म उसी काले अंधेरे पर प्रकाश डालती है।गटर बॉय वाकई एक दिल को झिंझोड़ देने वाली कहानी है।

अजीत कुमार ने बताया कि मैंने लोगों को गटर की सफाई करते देखा था लेकिन कभी ऐसा करने की कल्पना नहीं की थी। फिर मैंने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया और खुद को भूलकर सन्दीप बन गया। एक गटर के अंदर काम करने के मेरे पहले दिन ने मुझे खुद को इंसान के रूप में घृणित महसूस कराया।

गटर बॉय युवक संदीप के जीवन बदलने वाले अनुभव की कहानी है। यह फिल्म गटर में विकसित होने वाली जहरीली गैसों के कारण होने वाली मौतों के बारे में महत्वपूर्ण सवाल और मुद्दे भी उठाती है कि कैसे ये गरीब लोग सिर्फ अपने परिवार को खिलाने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

अजीत कुमार के लिए एक गटर बॉय का रोल निभाना काफी चैलेंजिंग था लेकिन थिएटर बैकग्राउंड से होने के कारण वह इसे सहजता से निभा पाए। अजीत कुमार सोशल इशु पर बेस्ड फिल्म गटर बॉय को इतने सारे फ़िल्म फेस्टिवल्स में जगह और नॉमिनेशन मिलने पर बेहद एक्साईटेड हैं।

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