Hindi short stories : आज रिया फिर गुस्से मै बैठी कमरे मै बड़बड़ा रही थी शुभम को कहा था कि सिर्फ हम दोनों घूमने जाएंगे लेकिन फिर भी अपनी बहन को पूछ लिया और उसने भी मना नहीं किया जबसे शादी हुई है पहले वाला प्यार तो बचा ही नहीं है पहले कितनी जिद्द करता था अकेले मिलने की हम कितना समय साथ गुजारते थे तब इसको कोई याद नहीं आता ,अब शादी हो गई प्यार खत्म आने दो मैं भी बोल दूंगी मुझे नहीं जाना अपनी बहन को ही ले जाओ।
और रिया का गुस्सा बढता जा रहा था उसने ठान लिया आज बात करके ही रहेगी।
रिया और शुभम की शादी को एक साल हो गया था दोनों साथ मै पढ़ते थे दोनों की दोस्ती प्यार मै बदल गयी और फ़िर शादी करने का फैसला लिया जैसे ही शुभम की नौकरी लगी तो उन्होंने अपने परिवार मै बात करी दोनों परिवार राजी हो गए और जल्दी ही शादी हो गयी शुभम के घर मै माता-पिता और एक छोटी बहन है रिया शुरू मै ससुराल मै बहुत खुश थी लेकिन धीरे धीरे उसे लगने लगा अब शुभम उस से पहले जैसा प्यार नहीं करता पहले कैसे मिलने की मिन्नत करता था जब भी आता कभी फूल, कभी चॉकलेट ,कभी तोहफा हमेशा लाता रिया को बहुत खुशी मिलती पर शादी के बाद शुभम कभी कभी ही ऐसा करता रिया सब नोटिस कर रही थी सबसे ज्यादा गुस्सा उसे तब आता जब शुभम अपनी बहन या सबको साथ ले जाने की बोलता तब रिया को लगता अब शुभम बदल गया है वो गुस्सा हो जाती तो शुभम बोलता की कभी कभी तो परिवार के साथ भी समय बिताना चाहिए आखिर उनका भी तो हक है रिया चुप रह जाती कुछ देर गुस्सा हो कर मान जाती पर उसके दिमाग मै ये बात घर कर गई कि सुमित अब पहले जैसा नहीं रहा इस वज़ह से वो सबसे दूरी बनाने लगी शुभम के घर मै सबने पूछा भी क्या हुआ रिया तो उसने बहाना बना दिया कुछ नहीं पर शुभम से शिकायत बढ़ती जा रही थी। आज उसने शुभम से कहा था हम शाम को घूमने जाएंगे और मिलन होटल मै खाना खाएंगे वहां का खाना सोना को भी बहुत पसंद था तो उसने सोना को भी बोल दिया तब से रिया गुस्सा हो रही थी।
शाम को शुभम आया तो रिया कमरे मै गुस्सा हो कर बैठी थी शुभम बोला ऐसे क्यूँ बैठी हो चलना नहीं है सोना भी तैयार हो रही है ये सुनकर रिया का गुबार निकल गया बोली अपनी बहन को ही ले जाओ तुम्हारा तो एक साल मै ही मन भर गया अब क्यूँ मुझे समय दोगे ना अब पहले जैसा प्यार है ना तुम्हें मेरी जरूरत तुमने कहा था मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा पर अब तुम प्रेमी नहीं ,पति बन गए हो जिसे एक पत्नी चाहिए जो बस घर की जिम्मेदारी उठाए जैसे तुम उठा रहे.....
शुभम ने रिया को बोलने दिया जब रिया थक गई तो उसने प्यार से बैठाया और बोला तुम सही कह रही हो मै एक जिम्मेदार पति बन गया लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मेरा प्यार कम हो गया लेकिन मै हमेशा प्रेमी नहीं बना रह सकता। पहले मै तुमसे कुछ देर मिलता था तो पूरा समय तुम्हारा होता था जब मुझे परिवार को समय देना होता तो मै तुम्हें समय नहीं देता था पर तब तुम्हें बुरा नहीं लगता था अब तुमको लग रहा कि तुम्हारा हक छिन रहा है पर तुम ही बताओ कभी कभी तो परिवार का भी ध्यान रखना पड़ेगा उनको भी तो मुझसे उम्मीद है और कितनी जगह हम अकेले ही जाते है और रही तोहफे की बात तो शादी के पहले तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं थी अब हमारी गृहस्थी है कल को परिवार बढ़ेगा तो हमें सोचना पड़ेगा अब तोहफे का रूप बदल गया है पर दिल अभी और हमेशा तुम्हें उतना ही प्यार करेगा और इन छोटी छोटी बातों से अपने बीच दूरी मत बढ़ाओ कल को सोना अपने ससुराल चली जाएगी हमें तो साथ रहना है
तभी सोना ने दरवाजा खटखटाया उसे आभास हो गया कि रिया उसके जाने से खुश नहीं है वो मना करने आई थी।
रिया को बात समझ आ गयी थी उसने कहा मुझे माफ़ करना सोना जो मै ऐसा सोच रही थी अब मुझे प्रेमी और पति का फर्क़ समझ आ गया हम सब साथ चलेंगे चलो जल्दी तैयार हो जाओ
शुभम खुश था और बोला मै भी कोशिश करूंगा कि कभी कभी प्रेमी बन जाऊँ।
रिया जोर से हँस दी और तैयार होने चली गयी। ।
अक्सर जब भी लव मेरिज होती है तो लड़कियां शादी से पहले वाली स्थिति से तुलना करती रहती है ये भूल जाती है कि शादी के बाद परिस्थिति बदल जाती है और तुलना करने के चक्कर मैं कितने पल यूँ ही निकल जाते है और रिश्ते मैं दूरी का कारण बन जाते है तो मेरी राय है कि आज की स्थिति को स्वीकार करे और आपसी रिश्ते को मजबूत करे तभी बंधन मजबूत रहेगा आपकी क्या राय है ..।।

