Short Story in Hindi: नीलम और अजय की शादी को बीस साल हो चुके थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन उनकी जिंदगी में एक अधूरापन था। घर में पसरा सन्नाटा जैसे हर पल नन्हे क़दमों की आहट तलाशता रहता था।
कई बार नीलम ने खुद को समझाया शायद मेरे जीवन में माँ बनने का सुख है की नहीं। लेकिन जब भी किसी पड़ोसी के घर बच्चे की किलकारी सुनाई देती, उसका दिल टूट जाता। अजय भी जानता था कि नीलम मुस्कुराती जरूर है, पर अंदर से बिखरी हुई है। एक दिन अजय किसी काम से पास के अस्पताल गया था। वहां उसने एक नर्स को कहते सुना , एक नवजात बच्चा मिला है मंदिर के बाहर, ना जाने कौन इतने कठोर मन का रह होगा जो बच्चे को ऐसे छोड़ गया ।
अजय के कदम वहीं रुक गए। उसने देखा रंग-बिरंगे कपड़े में लिपटा एक नन्हा सा चेहरा, जो रोने की जगह शांति से सो रहा था। उस पल उसे लगा, यह बच्चा किसी का ठुकराया हुआ नहीं, बल्कि उनका इंतजार कर रहा है। अजय ने नीलम को फोन किया नीलम, आज मैंने किसी को देखा है, जो हमारी जिंदगी बदल सकता है। नीलम कुछ समझ नहीं पाई, पर उसके मन में कुछ उम्मीद जाग गई।
कुछ दिनों बाद, दोनों ने सारे कानूनी कागज़ पूरे कर उस बच्चे को गोद ले लिया। उसका नाम रखा आदित्य , क्योंकि वह बच्चा उनके जीवन में नई रोशनी लेकर आया था। लेकिन समाज को यह रिश्ता रास नहीं आया। लोग बातें करने लगे , इस उम्र में बच्चा पालना आसान है क्या ? अब न तो शरीर में ताकत है, न समय की समझ, क्या करेंगे इतने छोटे बच्चे का ? अनाथ को घर लाए हैं, पता नहीं आगे क्या होगा। शुरू-शुरू में अजय और नीलम को दुख होता। वे सोचते, क्या सच में वे देर कर चुके हैं?
Dream big, little oneफिर नीलम एक दिन बोली, "अजय, हमने यह कदम दुनिया को दिखाने के लिए नहीं उठाया। यह बच्चा हमारी ममता की आखिरी उम्मीद है, और मैं इसे खोना नहीं चाहती। अजय ने उसका हाथ थामा और कहा, लोगों की बातों से ज्यादा सच्चा हमारा प्यार है। दिन बीतते गए। आदित्य उनके जीवन का केंद्र बन गया। नीलम उसकी हर छोटी मुस्कान पर खिल उठती। अजय अपने सारे काम जल्दी खत्म कर घर भागता, ताकि आदित्य की खिलखिलाहट सुन सके।
एक बार स्कूल की मीटिंग में एक महिला ने ताना मारा, आप दोनों तो अब दादा-दादी लगते हैं, कैसे संभालेंगे बच्चे को? नीलम मुस्कुराई और बोली, शायद उम्र का फर्क दिखता हो, लेकिन प्यार की उम्र नहीं होती। और इस बच्चे के लिए तो हम हर बार फिर से जवान हो जाते हैं।
समय उड़ता चला गया। आदित्य बड़ा हुआ, समझदार और दयालु बना। जब उसने अपने माता-पिता से अपनी असली पहचान जानी, तो उसकी आंखें भर आईं। उसने दोनों के हाथ पकड़कर कहा, आपने मुझे जन्म नहीं दिया, पर जीवन दिया है। मैं आपका कर्ज़ कभी नहीं चुका सकता। अब नीलम और अजय बूढ़े हो चुके हैं, पर जब शाम को आदित्य अपने ऑफिस से लौटता है और दरवाज़ा खोलते ही कहता है, "मां, पापा! आज मैं जल्दी आ गया," तो दोनों की आंखों में वही चमक लौट आती है, जो सालों पहले कहीं खो गई थी। वो घर, जो कभी सन्नाटे से भरा था, अब हर रोज़ हंसी और प्यार की गूंज से महकता है।
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