Hindi Kahani : आज अर्चना के साथ तुम्हारा व्यवहार बहुत अप्रत्याशित था।मैंने कभी तुम्हें इतने गुस्से में नहीं देखा,मीनू अपनी सहेली रीना से बोली।
यार मेरी भी बर्दाश्त की एक सीमा है और वो उसने लांघ ली थी।वो मेरी चुप्पी का नाजायज़ ही फायदा उठा रही थी।माना मैं किसी की बात का जल्दी से कोई उल्टा जवाब नहीं देती हूं पर ऐसा नहीं है कि मेरे मुंह में ज़ुबान ही नहीं है।जब पानी सिर से ऊपर चला जाता है तब अगली पिछली सब एक कर देती हूं।
आज तेरे बारे में एक नयी ही बात पता चली वरना वो तो यही सोचती थी कि रीना ज़रुरत से ज़्यादा सीधी है, कोई भी उसे कुछ भी कहकर चला जाता है पर वो कुछ प्रतिक्रिया नहीं देती है।
तुझे अपने बचपन की एक बात बताती हूं ऐसा कहकर रीना बोली ,बचपन में उसका अपने भाई से बहुत झगड़ा होता था।झगड़े का कारण कोई बड़ा नहीं होता था बस छोटी छोटी बात तूल पकड़ लेती थी।जब भी हम भाई -बहन में लड़ाई होती तो हमारी मम्मी लड़ाई शांत कराने की दृष्टि से मुझसे यही कहती थीं कि तू ही चुप हो जा ।जब तू चुप हो जायेगी तो बहस ही नहीं बढ़ेगी।वो उस समय हिंदी का एक मुहावरा"एक चुप सौ को हरावे" ज़रुर बोलती थीं पर मैं भी कहां चुप रहने वाली थी ,यही कहती थी लड़की हूं तो इसका मतलब ये नहीं है कि मैं दब जाऊं।बहस में जीतकर ही मानती थी, लेकिन वो मेरा बचपना था।जब थोड़ी समझदार हुई तो मुझे अपनी मम्मी की इस बात में दम लगा।इसे मैंने अपने जीवन में अपना लिया। मम्मी तो बहुत पहले इस दुनिया से चली गई पर उनके ये शब्द आज भी मुझे उनकी याद दिलाते हैं और जीवन को सरल बनाने में सहयोग देते हैं।अपनी मम्मी से सुने इन शब्दों का पाठ अब अपने बच्चों को सिखाती हूं।
मीनू बोली आजकल के बच्चे "एक चुप सौ को हरावे" पर अमल नहीं कर सकते, उन्हें तो हर बात का तुरंत पलटकर जवाब देना होता है।शायद इसमें बच्चों की गलती ना हो क्योंकि अधिकांशतः वो परिवार में जो देखते हैं वही सीखते हैं ।
बिल्कुल ठीक कह रही है तू ,शायद यही कारण है कि उसके बच्चे उसकी सिखायी बात को सीखते हैं क्योंकि वो उसे भी अमल करते हुए देखते हैं। ऐसा कहकर रीना मुस्कुराते हुए अपनी फाइलें उठाकर अपने केबिन में चली गई और मीनू उसकी मम्मी के बोले जाने वाले मुहावरे पर विचार करने लगी।
वन्दना भटनागर
मुज़फ्फरनगर

