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एक जादू की झप्पी का सफ़र- गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

एक जादू की झप्पी का सफ़र- गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

म सबने कभी न कभी अपनी माँ की जादू की झप्पी ज़रूर महसूस की होगी, क्योंकि माँ से अच्छी जादू की झप्पी कोई दे ही नहीं सकता। माँ के बाद अगर किसी की झप्पी जीवन भर याद रह जाए, तो वह सचमुच जादू बन जाती है।

ऐसी ही एक झप्पी मुझे मेरी गृह-विज्ञान की अध्यापिका, मिसेज़ नरूला, से मिली थी।

तब मैं नौवीं कक्षा में थी और वार्षिक परीक्षाएँ चल रही थीं। गृह-विज्ञान का प्रैक्टिकल इम्तिहान था। माँ ने पीरियड्स के बारे में थोड़ा-बहुत समझाया था, लेकिन उस समय इस विषय पर खुलकर बात नहीं होती थी। प्रैक्टिकल पूरा करने के बाद जब मैं अपनी बुक लिख रही थी, तभी सहेली ने बताया कि मेरी यूनिफॉर्म पर धब्बे लगे हैं। यह मेरा पहला अनुभव था। मैं घबराकर टॉयलेट में चली गई और रोने लगी। परीक्षा अधूरी थी, यूनिफॉर्म खराब हो चुकी थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।

तभी मेरी गृह-विज्ञान की अध्यापिका मुझे ढूँढ़ते हुए वहाँ पहुँचीं। उन्होंने बिना कुछ पूछे मुझे अपने गले से लगा लिया। कुछ देर बाद बड़े स्नेह से समझाया कि यह हर लड़की के जीवन का स्वाभाविक अनुभव है। उनकी बातों ने मेरा डर दूर कर दिया। उन्होंने मेरी हर संभव मदद की ताकि मैं अपनी परीक्षा पूरी कर सकूँ। उसी दिन मैंने मन में संकल्प लिया कि जब भी किसी को ऐसी झप्पी की ज़रूरत होगी, मैं उसे अवश्य दूँगी।

कुछ समय पहले मेट्रो में सफ़र करते हुए मुझे वह अवसर मिला। एक युवती रो रही थी। उसने बताया कि किसी ने उसका पर्स चोरी कर लिया है, जिसमें पूरे महीने की तनख़्वाह थी। वह छोटे शहर से आकर पीजी में रहती थी। तभी उसकी माँ का फ़ोन आया, लेकिन वह रोते हुए फ़ोन उठाने से डर रही थी। मैंने उसे समझाया कि माँ और अधिक परेशान होंगी। उसकी सहेली बनकर मैंने उसकी माँ से बात की और उन्हें आश्वस्त किया।

इसके बाद मैंने मेट्रो में मौजूद यात्रियों से उसकी सहायता करने का अनुरोध किया। सभी ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार मदद की और थोड़ी ही देर में अच्छी-खासी राशि इकट्ठी हो गई।

मैंने उस लड़की को गले लगाकर कहा, “ज़िंदगी में कभी हार मत मानना। कभी भी ज़रूरत पड़े, अपनी इस बहन को याद कर लेना।” यह देखकर मेट्रो में मौजूद कई महिलाओं ने भी उसे गले लगा लिया।

उस पल मुझे अपनी अध्यापिका मिसेज़ नरूला बहुत याद आईं। तब महसूस हुआ कि स्नेह से भरी एक जादू की झप्पी केवल आँसू नहीं पोंछती, बल्कि टूटते हुए मन को फिर से जीने का हौसला भी देती है। सचमुच, सही समय पर मिली एक झप्पी किसी का बिगड़ता हुआ जीवन सँवार सकती है।

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