Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
hindi short stories: जब भी मां की याद आए तुम मेरे पास आ जाना-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

hindi short stories: जब भी मां की याद आए तुम मेरे पास आ जाना-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi short stories: रिया के सहेली सरिता जो कैंसर की बीमारी से जूझ रही थी,इस दुनिया को छोड़कर चली गई।घर में अंतिम विदाई की तैयारियाँ चल रही थीं।लगभग सभी रिश्तेदार पहुँच चुके थे,लेकिन सरिता के मायके से कोई भी नहीं आया था।यह देखकर रिया ने सरिता की बेटी पीहू से पूछ ही लिया।वह दुखी होते हुए बोली-"आंटी,यह मम्मा की आखिरी इच्छा थी, इसलिए किसी को खबर नहीं की गई।"

रिया को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।उसके पति भी वहाँ पहुँच चुके थे और सरिता के पति को संभालने का प्रयास कर रहे थे।उनका रो-रोकर बुरा हाल था।दाह-संस्कार करके जब सब लोग लौट आए तो रिया पीहू के पास ही बैठी रही।
पीहू भी रिया से बहुत प्यार करती थी। आज उसे रिया में अपनी माँ की छवि दिखाई दे रही थी।कुछ देर बाद वह रिया की गोद में सिर रखकर बोली-"आंटी,मम्मा मामा को जान से ज्यादा प्यार करती थीं। उनका बहुत ध्यान रखती थीं।बचपन में अगर मामा को मार पड़ती तो दर्द मम्मा को होता था। देखते ही देखते दोनों बड़े हो गए।मम्मा की शादी हो गई,लेकिन मायके का मोह कभी नहीं छूटा।
फिर घर में मामी आईं।सूरत प्यारी थी,लेकिन स्वभाव बहुत कठोर था।उन्हें मम्मा और मामा का प्यार अच्छा नहीं लगता था।धीरे-धीरे मामा भी परिस्थितियों के आगे हार गए।नाना-नानी के जाने के बाद मम्मा का मायका उनसे छूट गया।अपनों से दूर होना आसान नहीं होता आंटी।
मम्मा बहुत कोमल स्वभाव की थीं। शायद यही दर्द उन्हें अंदर ही अंदर खाता रहा।जब वो बीमार पड़ीं तो दुनिया भर के लोग उनसे मिलने आए,लेकिन जिन भाई-भाभी को देखने की उनकी सबसे अधिक इच्छा थी,वे नहीं आए।शायद मम्मा समझ गई थीं कि अब उनके पास समय कम है,इसलिए उन्होंने कह दिया था..जीते जी जो न आए,अब उन्हें बुलाने की आवश्यकता नहीं।"
ये कहकर पीहू फूट-फूटकर रोने लगी।अपनी सहेली का यह दर्द जानकर रिया भी भीतर तक दुखी हो उठी।सरिता ने कभी अपने मन का यह दर्द उससे साझा नहीं किया था।रिया ने प्यार से पीहू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा-"बेटा, जीवन का हर दिन एक जैसा नहीं होता।
हमें अच्छे पलों को याद करके आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।" "जी आंटी,मैं भी मम्मा के साथ बिताए अच्छे पलों को याद करके खुश रहने की कोशिश करूँगी और पापा का भी ध्यान रखूँगी।

तभी तो मम्मा की आत्मा को शांति मिलेगी।" "सही कहा तूने मेरी बच्ची।
ईश्वर करे तुझे कभी किसी अपने से कोई दर्द न मिले।"कहकर रिया ने पीहू को गले से लगा लिया।उस पल रिया को लगा मानो सरिता अपनी बेटी को उसके माध्यम से स्नेह दे रही हो।रिया पीहू के आंसू पोंछते हुए बोली-"बेटा,जब भी तुम्हें माँ की याद आए,तुम मेरे पास आ जाना।
मैं तुम्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी।" रिया की उस ममता भरी बाँहों में पीहू को अपनी माँ का स्पर्श महसूस हुआ। उसके आँसू धीरे-धीरे थमने लगे।उस दिन रिया की ममता भरी बाँहों ने एक टूटे हुए मन को सहारा देकर ये साबित कर दिया,कि जीवन के गहरे दुखों को भरने के लिए कभी-कभी केवल एक "जादू की झप्पी" ही काफी होती है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Grehlakshmi