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hindi short stories: नन्ही बेटी की झप्पी-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

hindi short stories: नन्ही बेटी की झप्पी-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi short stories: आकांक्षा तब डेढ़ साल की बिटिया थी, संयुक्त परिवार का विस्तृत आँगन था और नौकरी की अपनी अलग दुनिया तीनों के बीच सामंजस्य बिठाना जैसे किसी कुशल नाविक का काम था, जो एक साथ कई धाराओं में पतवार थामे हो।

उस शाम थकान अपनी पराकाष्ठा पर थी। दो भरी-भरी बाल्टियों में कपड़े समेटकर छत पर चढ़ी। पीछे-पीछे मेरी नन्ही परछाईं भी डगमगाते कदमों से चली आई।
बाल्टी छत पर रखी, कमर सीधी की और न जाने कैसे उस एक पल में सारी थकान, सारा बोझ आँखों में उतर आया। माँ का घर याद आया वो आँगन, वो निश्चिंतता, वो हाथ जो थपथपा देते थे बिना कुछ कहे।
तभी वो आई ..नन्हे-नन्हे पाँव, लड़खड़ाती चाल और मेरे पास रुककर बोली
"का हुआ? अच्छे बच्चे लोते नईं!"
मैं मुँडेर पर बैठी थी। उसने एक पल मुझे देखा, फिर अपनी नन्ही बाँहें फैलाईं और बोली
"मेली बेटी है!"
और उन छोटे-छोटे हाथों ने मुझे ऐसे भींच लिया, जैसे पूरी सृष्टि का स्नेह उन्हीं दो मुट्ठियों में सिमट आया हो।
थकान कहाँ गई, पता न चला। जैसे किसी ने जादू की झप्पी दे दी हो और उस एक स्पर्श में उस एक वाक्य में, मेरी सारी दुनिया फिर से ऊर्जावान हो उठी।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Grehlakshmi